निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर स्थित सीलमपुरा के प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। मंदिर में विराजित लक्ष्मीनारायण देव को भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूप में हिमालय की गोद में सजाया गया। बर्फ से आच्छादित पर्वतमालाओं, कैलाश पर्वत की प्रतीकात्मक झांकी और दिव्य प्रकाश सज्जा ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। इस दिव्य श्रृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
भक्ति रस में डूबा मंदिर परिसर
घंटियों की अनुगूंज, वैदिक मंत्रोच्चार, आरती-पूजन और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु शिव-पार्वती के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर नजर आए और अभिषेक, पूजन व आरती में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। पूरा वातावरण “ॐ नमः शिवाय” के जप से गुंजायमान रहा।
शिव-पार्वती मिलन की पौराणिक महिमा
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हिमालय की पुत्री गौरा की अटूट श्रद्धा और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी दिव्य मिलन की स्मृति में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है, जो शिव-शक्ति के अनादि और अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
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नारायण और शिव एक ही परम तत्व
स्वामीनारायण मंदिर के महंत शास्त्री चिंतनप्रियदास जी स्वामी ने बताया कि भगवान नारायण और भगवान शिव भले ही अलग-अलग रूपों में पूजे जाते हों, लेकिन तत्व रूप में दोनों एक ही परम शक्ति के प्रतीक हैं। महाशिवरात्रि पर लक्ष्मीनारायण देव को शिव-पार्वती स्वरूप में सजाना सनातन धर्म की उसी अद्वैत भावना का संदेश है, जिसमें सभी देव रूप एक ही सत्य की अभिव्यक्ति माने जाते हैं।
आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम
महाशिवरात्रि पर सजी यह दिव्य झांकी बुरहानपुर वासियों के लिए आस्था, अध्यात्म और सांस्कृतिक एकता का अनूठा प्रतीक बन गई। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा-भक्ति के साथ दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।













