रायपुर : छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। सरकारी भुगतान नीति से नाराज निजी अस्पतालों ने 30 जनवरी को आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज बंद रखने का ऐलान किया है। इस फैसले से राज्य के हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
भुगतान न मिलने से अस्पतालों की हालत खराब
एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) के छत्तीसगढ़ चैप्टर ने स्पष्ट किया है कि निजी अस्पताल पिछले कई महीनों से सरकार से भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक बकाया राशि जारी नहीं की गई है। संगठन का दावा है कि पिछले एक साल से 1500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अटका हुआ है, जिससे अस्पतालों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
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सरकारी नीति से नाराजगी, मजबूरी में लिया फैसला
AHPI का कहना है कि बार-बार पत्राचार और बातचीत के बावजूद भुगतान को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अस्पतालों के लिए आयुष्मान योजना के तहत इलाज जारी रखना अब संभव नहीं है। संगठन के अनुसार यह फैसला मरीजों के हित में नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी के चलते लिया गया है।
गरीब मरीजों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुफ्त और बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। लेकिन निजी अस्पतालों के इस फैसले के बाद—
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गंभीर बीमारियों के मरीज
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आपातकालीन सर्जरी की जरूरत वाले लोग
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ग्रामीण और गरीब तबके के मरीज
सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। कई मरीज ऐसे अस्पतालों पर निर्भर हैं, जहां आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज संभव होता है।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
इस फैसले ने राज्य सरकार के सामने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
समाधान की उम्मीद या लंबा टकराव?
फिलहाल सभी की नजर सरकार और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है। सवाल यह है कि—
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क्या सरकार बकाया भुगतान जल्द जारी करेगी?
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या फिर मरीजों को लंबे समय तक इलाज के लिए भटकना पड़ेगा?
स्पष्ट है कि इस टकराव में सबसे बड़ा नुकसान आम जनता और गरीब मरीजों को उठाना पड़ सकता है।













