अजित पवार के निधन से फिर उठा सवाल, 7 महीने में दूसरी बड़ी राजनीतिक मौत, जवाब आज भी अधूरे

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित गुट) के प्रमुख अजित पवार का विमान हादसे में निधन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि देश के उस दर्दनाक इतिहास की एक और कड़ी है, जिसमें आसमान ने कई बड़े नेताओं को हमसे छीन लिया। पिछले सात महीनों में यह दूसरी बड़ी राजनीतिक मौत है। इससे पहले जून 2025 में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की भी विमान हादसे में जान चली गई थी।

भारत में नेताओं और विमान हादसों का इतिहास

भारत के राजनीतिक इतिहास में अब तक कम से कम सात बड़े नेताओं की मौत प्लेन या हेलिकॉप्टर क्रैश में हो चुकी है। इनमें से तीन नेता मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हादसों का शिकार हुए।

पहला बड़ा हादसा: बलवंतराय मेहता

गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता (1963–1965) भारत के पहले बड़े नेता थे, जिनकी मौत विमान हादसे में हुई। 1965 के युद्ध के दौरान कच्छ के रण में निरीक्षण के लिए जाते समय उनका विमान पाकिस्तान द्वारा मार गिराया गया।

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संजय गांधी: युवा राजनीति का अंत

23 जून 1980 को कांग्रेस सांसद संजय गांधी की मौत ने देश को झकझोर दिया। विमान उड़ाने के शौक के दौरान करतब दिखाते समय उनका प्लेन क्रैश हो गया।

माधवराव सिंधिया और जी.एम.सी. बालयोगी

2001 में कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया की मैनपुरी के पास विमान दुर्घटना में मौत हो गई। वहीं 2002 में लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी हेलिकॉप्टर क्रैश में जान गंवा बैठे।

मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मौत

2009 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी और 2011 में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री डोरजी खांडू की मौत ने यह साबित कर दिया कि सत्ता का शीर्ष पद भी आसमानी खतरों से सुरक्षित नहीं है।

हालिया घटनाएं: विजय रुपाणी और अजित पवार

2025 में विजय रुपाणी और अब अजित पवार—इन हादसों ने VIP उड़ानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निष्कर्ष: सबक या सिर्फ आंकड़े?

हर हादसे के बाद जांच होती है, रिपोर्ट आती है और फिर समय के साथ मामला ठंडा पड़ जाता है। सवाल यह है कि क्या इन त्रासदियों से कोई स्थायी सबक लिया गया, या ये सिर्फ इतिहास के आंकड़े बनकर रह जाएंगी?

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