Chhattisgarh Cooks Protest News : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर पिछले 30 दिनों से डटे मिड-डे मील रसोइया संघ के आंदोलन में अब मातम पसर गया है। कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहीं दो महिला रसोइयों की मौत हो गई है, जबकि एक अन्य महिला की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। इस घटना ने प्रशासन की संवेदनशीलता और धरना स्थल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजराम कश्यप ने बताया कि मृतका दुलारी यादव (शासकीय प्राथमिक शाला सलधा) की 25 जनवरी को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आज उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं, बालोद जिले की रुक्मणी सिन्हा की भी मौत इसी संघर्ष के दौरान हुई। बताया जा रहा है कि धरना स्थल पर भीषण ठंड, गंदे पानी की आपूर्ति और शौचालयों की बदहाली के कारण प्रदर्शनकारी संक्रमण, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
प्रदेश भर की लगभग 86,000 रसोइया, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं, 29 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इनकी मुख्य मांग मानदेय में वृद्धि कर उसे कलेक्टर दर पर करने की है। वर्तमान में इन रसोइयों को मात्र 66 रुपये प्रतिदिन की दर से मानदेय मिलता है, जो आज की महंगाई के दौर में उनके श्रम का अपमान प्रतीत होता है। हड़ताल के कारण राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की सेवा ठप पड़ी है, लेकिन शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार चेतावनी देने के बावजूद धरना स्थल पर न तो साफ पीने के पानी की व्यवस्था की गई और न ही स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। “कलेक्टर दर” की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब रसोइयों के मान-सम्मान और जीवन रक्षा की लड़ाई बन गया है। दो मौतों के बाद रसोइया संघ में भारी आक्रोश है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और मृतक परिवारों को मुआवजा नहीं मिलता, आंदोलन और उग्र होगा।













