Indore Police Corruption : इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से पुलिसिया बर्बरता और भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समूचे विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एमआईजी थाने के नौ पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने एक गंभीर टीबी मरीज, अजय सोनी को न केवल गलत तरीके से गिरफ्तार किया, बल्कि उसे ड्रग्स तस्करी के झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई।

क्या है पूरा मामला? मृतक की बहन राधिका सोनी द्वारा जिला अदालत में दायर याचिका के अनुसार, अजय सोनी गंभीर टीबी रोग से पीड़ित था। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था कि उसका जीवन अब कुछ ही दिनों का शेष है। इसी मरणासन्न हालत में एमआईजी पुलिस के नौ कर्मचारी उसे घर से उठाकर ले गए। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे छोड़ने के बदले 40,000 रुपये की मांग की। परिजनों ने अपनी सामर्थ्य अनुसार 25,000 रुपये दिए भी, लेकिन पुलिस ने पैसे और अजय का स्कूटर रख लिया और उसे जेल भेज दिया।
झूठे साक्ष्य और मौत: पुलिस ने कागजों में अजय को देवास रोड स्थित अयोध्या कॉलोनी से ब्राउन शुगर तस्करी करते हुए गिरफ्तार दिखाया। जेल जाने के बाद अजय को टीबी का उचित इलाज नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई। राधिका ने हार नहीं मानी और कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज पेश किए, जिसमें स्पष्ट दिख रहा है कि पुलिस अजय को उसके घर से ही उठाकर ले जा रही थी, जो पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह झुठलाता है।
अदालत का कड़ा रुख: मामले की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई को संदेहास्पद और अमानवीय पाया। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर को सभी नौ संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और रिपोर्ट पेश करने के सख्त आदेश दिए हैं।
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राधिका सोनी (बहन): “मेरे भाई को मरते समय भी चैन नहीं मिला। पुलिस ने उसे घर से उठाया और पैसे लेने के बाद भी उसे जेल भेज दिया।”
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कृष्ण कुमार कुन्हारे (एडवोकेट): “यह कानून का खुला उल्लंघन है। सीसीटीवी फुटेज से साफ है कि पुलिस ने झूठा केस बनाया है।”
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संतोष सिंह (पुलिस कमिश्नर): “कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”










