Wednesday, August 19, 2026
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CG Liquor Scam: ED के खिलाफ सौम्या चौरसिया पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, लगी कवासी लखमा की भी जमानत अर्जी

रायपुर :  छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में अब कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। इस मामले में जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी सौम्या चौरसिया ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। वहीं, इसी केस में आरोपी पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने भी सर्वोच्च न्यायालय में जमानत अर्जी लगाई है। दोनों मामलों पर 28 जनवरी को सुनवाई तय की गई है।

ED की गिरफ्तारी के खिलाफ सौम्या चौरसिया की याचिका

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को ED ने शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा EOW और ACB ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की है। अब सौम्या चौरसिया ने ED की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में गिरफ्तारी की प्रक्रिया और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।

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शराब सिंडिकेट को संरक्षण देने का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौम्या चौरसिया पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए शराब सिंडिकेट को संरक्षण दिया। आरोपों में यह भी कहा गया है कि शराब कारोबार से जुड़े अहम फैसलों में उनकी भूमिका रही और अवैध लेन-देन से जुड़ी रकम तक उनकी पहुंच थी। जांच में यह भी सामने आया है कि उनका संपर्क शराब घोटाले से जुड़े कई प्रमुख आरोपियों से था।

कवासी लखमा की जमानत याचिका

इसी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है। कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि शराब घोटाले के जरिए उन्हें करीब 64 करोड़ रुपये की अवैध राशि मिली।

राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल

शराब घोटाले से जुड़े ये मामले पहले ही छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल ला चुके हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में एक साथ कई याचिकाओं की सुनवाई से यह मामला और भी अहम हो गया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करार दे रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

28 जनवरी को होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी वैध मानी जाएगी या नहीं, और क्या कवासी लखमा को जमानत मिल पाएगी। यह फैसला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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