India US Trade Agreement 2026 : भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की सुगबुगाहट तेज : विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी सीनेटर के बीच रणनीतिक चर्चा

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India US Trade Agreement 2026 : नई दिल्ली में रविवार सुबह विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी सीनेटर स्टीव डैनिस के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस मुलाकात की जानकारी खुद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने बताया कि सीनेटर डैनिस के साथ भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के रणनीतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े व्यापारिक समझौतों की आधारशिला हो सकती है।

हाल के दिनों में वाशिंगटन से आए बयानों ने भी इन अटकलों को बल दिया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में भारत को अमेरिका का ‘सबसे जरूरी साझेदार’ बताया था। उनके इस बयान के तुरंत बाद एक प्रभावशाली अमेरिकी सांसद का भारत आना और विदेश मंत्री से मिलना स्पष्ट संकेत दे रहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। अमेरिका अब भारत को न केवल एक बड़े बाजार के रूप में देख रहा है, बल्कि चीन के विकल्प के तौर पर एक विश्वसनीय सप्लाई चेन पार्टनर भी मान रहा है।

इस मुलाकात से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी फोन पर लंबी चर्चा की थी। उस बातचीत के केंद्र में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र जैसे संवेदनशील मुद्दे थे। भारत विशेष रूप से रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और महत्वपूर्ण खनिजों की निर्बाध आपूर्ति के लिए अमेरिका के साथ ठोस समझौता चाहता है, ताकि भविष्य की तकनीक और ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन (2.0) के दौरान व्यापारिक शुल्कों (Taxes) को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, उसे सुलझाने के लिए दोनों पक्ष सक्रिय हैं। अमेरिका चाहता है कि भारतीय बाजारों में उसके कृषि उत्पादों और टेक्नोलॉजी को अधिक पहुँच मिले, वहीं भारत अपने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र और निर्यातकों के लिए अमेरिकी नियमों में सरलता की उम्मीद कर रहा है। सीनेटर डैनिस जैसे प्रभावशाली नेताओं की भारत यात्रा इस दिशा में ‘ट्रैक-2’ डिप्लोमेसी का हिस्सा मानी जा रही है।

आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रालयों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता होने की संभावना है। यदि यह ट्रेड डील धरातल पर उतरती है, तो यह न केवल दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को प्रभावित करेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के कद को और मजबूती प्रदान करेगी। फिलहाल, नई दिल्ली और वाशिंगटन दोनों ही इस वार्ता को लेकर सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं, जिससे जल्द ही किसी बड़ी ‘खुशखबरी’ की उम्मीद बढ़ गई है।

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