Friday, September 11, 2026
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तड़का लगाना हुआ महंगा! जीरा-धनिया-राई की महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : रसोई में रोज़ इस्तेमाल होने वाले मसालों की कीमतों में अचानक आई तेज़ी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जीरा, धनिया, राई, कलमी और शाहजीरा जैसे जरूरी मसाले पिछले कुछ दिनों में 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक महंगे हो गए हैं। इन मसालों की महंगाई का सीधा असर घरेलू बजट और खाने के स्वाद दोनों पर पड़ रहा है।

जीरे की बुआई में देरी बनी बड़ी वजह

जीरा उत्पादक प्रमुख राज्यों गुजरात और राजस्थान में इस बार मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में अधिक नमी और मिट्टी देर से सूखने के कारण बुआई समय पर नहीं हो सकी। इसी वजह से जीरे की आवक कम है और बाजार में इसकी कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। थोक बाजार में अच्छी क्वालिटी का जीरा 290 से 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि चिल्लर में इसके दाम 350 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर बिक रहे हैं।

मसाला थोक भाव (₹/किग्रा) चिल्लर भाव (₹/किग्रा) वृद्धि (₹/किग्रा)
जीरा (क्वालिटी) ₹290 – ₹300 ₹300 – ₹350+ ₹20 – ₹30
धनिया (बारीक) ₹165 – ₹175 ₹180+ ₹15 – ₹20
राई ₹120 ₹140+ ₹20
शाहजीरा ₹950 – ₹1000 ₹1100+ ₹100
कलमी ₹280 ₹300+ ₹20

धनिया और राई ने भी बढ़ाया रसोई का खर्च

जीरे के साथ-साथ धनिया और राई की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। थोक में बारीक धनिया 165 से 175 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, वहीं चिल्लर में इसके भाव 180 रुपये से ऊपर हैं। राई, जो पहले 100 रुपये किलो के आसपास थी, अब थोक में 120 रुपये और चिल्लर में 140 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी है।

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शाहजीरा और कलमी ने दिया बड़ा झटका

महंगे मसालों की सूची में शाहजीरा सबसे आगे निकल गया है। इसमें करीब 100 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। थोक में शाहजीरा 950 से 1000 रुपये प्रति किलो और चिल्लर में 1100 रुपये से अधिक बिक रहा है। वहीं कलमी भी थोक में 280 रुपये और चिल्लर में 300 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है।

ऊंझा मंडी में आवक घटने से बढ़ी चिंता

जीरे की सबसे बड़ी ट्रेडिंग मंडी ऊंझा में इस समय आवक बेहद कम है। व्यापारियों के अनुसार इस साल जीरे का उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी से घटकर करीब 90–92 लाख बोरी रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौसम और भू-राजनीतिक हालात के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।

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