Trump Venezuela Oil Meeting : वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियों के बीच व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक ने वेनेजुएला के तेल संकट को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए कंपनियों के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसके जवाब में एक्सॉनमोबिल जैसी कंपनियों ने वहां की जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए निवेश को फिलहाल असंभव बताया है। कंपनियों का मानना है कि वहां के मौजूदा हालात निवेश के लिहाज से बिल्कुल भी अनुकूल नहीं हैं।
Exxon CEO: If you look at the commercial constructs, frameworks in place in Venezuela today, it’s uninvestable. Significant changes have to be made to these frameworks, the legal system. There has to be durable investment protections and change to the hydrocarbon laws. pic.twitter.com/vpdH6ftfzm
— Acyn (@Acyn) January 9, 2026
एक्सॉनमोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि वेनेजुएला की अस्थिर कानूनी व्यवस्था और निवेश सुरक्षा की कमी सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि पुराने हाइड्रोकार्बन कानूनों और कमजोर व्यावसायिक ढांचे के कारण अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए वहां काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। वुड्स ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि उनकी कंपनी की संपत्ति वेनेजुएला में पहले भी दो बार जब्त की जा चुकी है, इसलिए वे इस बार बहुत सोच-समझकर कदम उठाना चाहते हैं।
तेल कंपनियों की इन आशंकाओं के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप अपने रुख पर अड़े हुए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अगर बड़ी कंपनियां निवेश से पीछे हटती हैं, तो दर्जनों अन्य छोटी कंपनियां इस अवसर का लाभ उठाने के लिए कतार में खड़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सरकार इस निवेश के लिए कोई वित्तीय गारंटी या सरकारी सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला को स्वयं इन कंपनियों को सुरक्षा का आश्वासन देना होगा और कंपनियों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था खुद संभालनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की इस योजना के पीछे एक बड़ी कूटनीतिक रणनीति छिपी है। वे वेनेजुएला के तेल को अमेरिकी नियंत्रण में लाकर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को गिराना चाहते हैं। इसके साथ ही अमेरिका की योजना भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को वेनेजुएला का तेल बेचने की है, लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि पूरा व्यापार वाशिंगटन द्वारा नियंत्रित बैंकिंग ढांचे के माध्यम से होगा। यह कदम सीधे तौर पर रूस और चीन के ऊर्जा प्रभुत्व को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
कंपनियों की चुनौती को स्वीकार करते हुए डैरेन वुड्स ने संकेत दिया है कि एक्सॉनमोबिल जल्द ही वेनेजुएला में तेल बुनियादी ढांचे की स्थिति का आकलन करने के लिए एक तकनीकी टीम भेज सकती है। यह टीम वहां की रिफाइनरियों और पाइपलाइनों की वर्तमान स्थिति की जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि वित्तीय और तकनीकी रूप से वहां काम शुरू करना कितना व्यवहारिक है। कंपनियों का अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में वहां कानूनी और वित्तीय सुरक्षा के उपाय कितने मजबूत होते हैं।
कुल मिलाकर वेनेजुएला का तेल अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी रणनीतिक परीक्षा बन गया है। यदि ट्रंप कंपनियों को वहां निवेश के लिए मनाने में सफल होते हैं, तो यह वैश्विक तेल बाजार की पूरी तस्वीर बदल सकता है। हालांकि, कंपनियों द्वारा उठाई गई शर्तों और वेनेजुएला की आंतरिक अस्थिरता को देखते हुए यह राह अभी काफी कठिन और अनिश्चितताओं से भरी नजर आती है।













