Sunday, August 30, 2026
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Chhattisgarh High Court Decision : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरी शादी के केवल आरोप लगाने से नहीं रुकेगा भरण-पोषण; पति को देना होगा गुजारा भत्ता

CG NEWS
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Chhattisgarh High Court Decision : बिलासपुर (21 फरवरी 2026): छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक नजीर पेश की है। अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ कहा कि जब तक पति ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के साथ यह साबित नहीं कर देता कि उसकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है, तब तक वह भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता। कोर्ट ने जशपुर के एक व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पत्नी को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

क्या था पूरा मामला? जशपुर जिले के रहने वाले एक युवक का विवाह 2009 में हुआ था और उनकी तीन बेटियां हैं। पत्नी का आरोप था कि बेटियों के जन्म के बाद पति ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और बाद में किसी दूसरी महिला को पत्नी बनाकर घर ले आया। इसके बाद पीड़िता को घर से बेदखल कर दिया गया। न्याय की मांग लेकर महिला ने फैमिली कोर्ट में गुहार लगाई, जहां कोर्ट ने दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर पत्नी के हक में भरण-पोषण का फैसला सुनाया।

पति का तर्क और हाईकोर्ट की टिप्पणी फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील की। पति के वकील ने दलील दी कि पत्नी ने अपनी मर्जी से घर छोड़ा है और बिहार में एक अन्य व्यक्ति के साथ ‘चूड़ी प्रथा’ के माध्यम से विवाह कर लिया है। इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि:

“केवल आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं है। यदि पति यह दावा करता है कि पत्नी ने पुनर्विवाह कर लिया है या वह किसी अन्य संबंध में है, तो उसे प्रमाणित करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है। निराधार आरोपों के सहारे किसी महिला के वैधानिक अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।”

पारिवारिक कानूनों के लिए अहम संदेश हाईकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट ने सभी पहलुओं का समुचित मूल्यांकन किया है और उस फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। इस फैसले को कानूनी विशेषज्ञों द्वारा एक मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह उन पतियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो भरण-पोषण से बचने के लिए चरित्र हनन या झूठे विवाह का सहारा लेते हैं।

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