भोपाल : राजधानी भोपाल में सक्रिय एक रहस्यमय डेरे और उसके प्रमुख राजू की तलाश अब राष्ट्रीय स्तर की जांच का रूप ले चुकी है। राजू की गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश समेत छह राज्यों की पुलिस संयुक्त अभियान चला रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
देशभर में डेरे को संरक्षण देने वालों का डेटा तैयार
जांच एजेंसियां अब डेरे को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और स्थानीय संपर्कों का डिजिटल और फिजिकल डेटा तैयार कर रही हैं। इसमें जमीन, फंडिंग, ठिकानों और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। पुलिस का फोकस इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने पर है।
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पुलिस नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी
सूत्रों के मुताबिक, डेरे से जुड़े लोगों ने अलग-अलग राज्यों में पुलिस और प्रशासनिक सिस्टम से बचने के लिए मजबूत नेटवर्क खड़ा किया था। अब पुलिस इस नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त करने में जुटी है। डेरे से जुड़े पुराने सहयोगियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
जमीन के कागजातों की गहन जांच
डेरे की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की सर्चिंग और वेरिफिकेशन का काम तेज कर दिया गया है। कई जगहों पर जमीन के कागजात संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या बेनामी संपत्तियों के जरिए अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया गया।
वारदातों के लिए महीनों का सफर
जांच में सामने आया है कि डेरे से जुड़े लोग वारदातों को अंजाम देने के लिए महीनों तक अलग-अलग राज्यों में सफर करते थे। यह पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था, जिससे लंबे समय तक कानून की पकड़ से बचा रहा।
2014 की आगजनी से आया था डेरा चर्चा में
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में 39 घरों में आगजनी की घटना के बाद यह डेरा पहली बार सुर्खियों में आया था। इसके बाद से लगातार विवादों और आपराधिक गतिविधियों से इसका नाम जुड़ता रहा है। पुलिस अब इस पूरे इतिहास को खंगालते हुए राजू तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।











