Friday, October 2, 2026
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Mob Lynching Bangladesh : बांग्लादेश संकट: शेख मुजीबुर रहमान के आवास में फिर तोड़फोड़, ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परिवर्तन पर मंडराया संकट

Mob Lynching Bangladesh : ढाका। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हालात एक बार फिर नियंत्रण से बाहर होते नजर आ रहे हैं। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा ने सांप्रदायिक और अराजक रूप ले लिया है। इस अशांति के बीच मयमनसिंह शहर में एक हिंदू व्यक्ति, दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) किए जाने का जघन्य मामला सामने आया है। ईशनिंदा के कथित आरोप में भीड़ ने न केवल दीपू की हत्या की, बल्कि उनके शव को आग के हवाले भी कर दिया।

Mob Lynching Bangladesh : इस घटना पर वैश्विक स्तर पर आक्रोश के बीच मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि “नए बांग्लादेश” में ऐसी हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और इस अपराध के दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। सरकार ने देशवासियों से शांति बनाए रखने और नफरत फैलाने वाले तत्वों का विरोध करने की अपील की है। मुख्य सलाहकार कार्यालय ने स्पष्ट किया कि मीडिया संस्थानों और अल्पसंख्यकों पर हमले देश की लोकतांत्रिक प्रगति के लिए बड़ा खतरा हैं।

Mob Lynching Bangladesh : हिंसा की जड़ें 12 दिसंबर की उस घटना में हैं, जब चुनाव प्रचार के दौरान इंकलाब मंच के प्रवक्ता और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को सिर में गोली मार दी गई थी। इलाज के दौरान सिंगापुर में हादी की मौत के बाद ढाका सहित कई इलाकों में भीड़ सड़कों पर उतर आई। प्रदर्शनकारियों ने न केवल अखबारों के दफ्तरों में आगजनी की, बल्कि चटगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर भी ईंट-पत्थर फेंके। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के जरिए भीड़ को तितर-बितर कर 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।

Mob Lynching Bangladesh : प्रदर्शनकारियों के निशाने पर बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का आवास भी रहा, जहां पहले से ध्वस्त इमारत में दोबारा तोड़फोड़ की गई। सरकार ने मीडिया संस्थानों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला बताया है। गौरतलब है कि अगले साल 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं और उस्मान हादी उस चुनाव के प्रमुख उम्मीदवार थे।

Mob Lynching Bangladesh : वर्तमान में बांग्लादेश एक नाजुक लोकतांत्रिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही देश में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। यूनुस सरकार ने आगाह किया है कि कुछ असामाजिक तत्व अराजकता फैलाकर इस ऐतिहासिक परिवर्तन को पटरी से उतारना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर टिकी हुई हैं।

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