National Highway No. 30 : गढ़/रीवा। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-30 पर गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत तेंदुआ बाईपास पर बीती रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा हुआ। रीवा से प्रयागराज की ओर जा रहे दो ट्रकों के बीच हुई भीषण भिड़ंत में एक चालक ट्रक के केबिन में बुरी तरह फंस गया। गनीमत रही कि पुलिस की तत्परता और घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चालक को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने एमपीआरडीसी (MPRDC) की कार्यप्रणाली और सड़क सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है।
National Highway No. 30 : जानकारी के अनुसार, 19 और 20 दिसंबर की दरमियानी रात करीब 2 बजे ट्रक क्रमांक UP 70 FT 6528 रीवा से प्रयागराज की ओर जा रहा था। इसी दौरान तेंदुआ बाईपास के पास शाम से खराब खड़े एक ट्रक (UP 70 AT 9767) को बचाने के प्रयास में एक ट्रेलर (NL 01 AG 9408) ने अपनी साइड बदली, जिससे पीछे से आ रहा ट्रक उससे टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पीछे वाले ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और चालक अंदर ही फंस गया।
National Highway No. 30 : घटना की सूचना मिलते ही गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, सहायक उपनिरीक्षक हनुमानदीन वर्मा और आरक्षक समर पटेल व सुहेल खान के साथ मौके पर पहुंचे। घने कोहरे के बीच पुलिस ने रेस्क्यू शुरू किया, लेकिन विडंबना देखिए कि नेशनल हाईवे की देखरेख करने वाली कंपनी एमपीआरडीसी के पास चालक को सुरक्षित निकालने के लिए कटर या अन्य आधुनिक उपकरण तक उपलब्ध नहीं थे। अंततः घरेलू गैस सिलेंडर से चलने वाले साधारण कटर की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद सुबह करीब 7:50 बजे चालक को बाहर निकाला जा सका।
National Highway No. 30 : इस दुर्घटना का मुख्य कारण शाम 6 बजे से सड़क पर खराब खड़ा ट्रक बना। नियमानुसार एमपीआरडीसी की पेट्रोलिंग पार्टी को 24 घंटे सक्रिय रहकर ऐसे वाहनों को हटाना चाहिए, लेकिन घंटों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा, रीवा-प्रयागराज मार्ग पर जगह-जगह बने अवैध कट और गड्ढे हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है।
फिलहाल, पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया है। लेकिन सवाल वही बना हुआ है कि इन हादसों का असली जिम्मेदार कौन है? क्या आधुनिक उपकरणों के अभाव और पेट्रोलिंग में लापरवाही बरतने वाली एमपीआरडीसी पर प्रशासन कोई कठोर कार्रवाई करेगा या फिर एक और बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा?











