Vote thieves, leave the throne : नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 14 दिसंबर 2025 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित ‘वोट चोर गद्दी छोड़ महारैली’ में देश भर से लाखों कार्यकर्ताओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस ऐतिहासिक रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी डाटा में कथित हेरफेर और ‘SIR’ जैसे तंत्रों के माध्यम से मतदाता अधिकारों के दमन के खिलाफ एकजुट संवैधानिक विरोध दर्ज कराना था।
महारैली को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने संबोधित किया। जननायक राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला और लोकतंत्र बचाने के लिए हर कार्यकर्ता को संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। मंच पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, और महासचिव प्रियंका गांधी की उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा।
Vote thieves, leave the throne : छत्तीसगढ़ नेतृत्व की दमदार और प्रभावी भागीदारी
इस महारैली में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव, वरिष्ठ नेता चरणदास महंत, और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज समेत प्रदेश के कई विधायक और पदाधिकारी इसमें शामिल हुए। छत्तीसगढ़ नेतृत्व की दमदार भागीदारी ने रैली को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति दी।
Vote thieves, leave the throne : किसान कांग्रेस का प्रभावी नेतृत्व और लामबंदी
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस (एआईकेसी) ने इस रैली में किसानों की शक्ति का प्रभावी प्रदर्शन किया। एआईकेसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैरा और राष्ट्रीय प्रभारी अखिलेश शुक्ला ने रैली का मार्गदर्शन किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस ने रैली में अधिकतम लामबंदी सुनिश्चित करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, जिसका नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा और संगठन प्रभारी अकील हुसैन ने किया।
Vote thieves, leave the throne : छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री नीरज सोनी, आशीष सिंह समेत सभी प्रदेश पदाधिकारी और जिला अध्यक्षगण, जिनमें विशेष रूप से योगेश यादव और जागृत सोनकर शामिल थे, अपनी-अपनी इकाइयों के साथ दिल्ली पहुँचे और महारैली को सफल बनाया। किसान कांग्रेस के सदस्यों ने किसान गमछा पहनकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ के नारे के साथ संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।
Vote thieves, leave the throne : कुल मिलाकर, इस महारैली के माध्यम से कांग्रेस ने देश में लोकतंत्र की रक्षा और चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस ने इस राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर यह साबित कर दिया कि वह किसानों के अधिकारों की लड़ाई और लोकतंत्र बचाने की मुहिम में अग्रिम पंक्ति में खड़ी है।













