Saturday, September 26, 2026
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AIIMS Bhopal Case : वेंटिलेटर पर डॉ. रश्मि वर्मा, MRI में ब्रेन डैमेज की पुष्टि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंचा AIIMS मामला

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डॉ. रश्मि वर्मा केस, हाई लेवल कमेटी गठित

भोपाल: राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा द्वारा आत्महत्या के प्रयास का मामला सामने आने के बाद संस्थान में हड़कंप मच गया है। घटना की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। साथ ही, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. यूनुस को उनके पद से हटा दिया गया है।

ड्यूटी के बाद हुई दर्दनाक घटना
यह घटना 11 दिसंबर की रात की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, डॉ. रश्मि वर्मा ने अपनी नियमित ड्यूटी पूरी करने के बाद घर पहुंचकर एनेस्थीसिया की अत्यधिक मात्रा स्वयं को इंजेक्ट कर ली। इससे उनका हृदय लगभग 7 मिनट तक काम नहीं कर सका। इस दौरान शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंची।

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MRI रिपोर्ट में ब्रेन डैमेज की पुष्टि
चिकित्सकीय सूत्रों के अनुसार, डॉ. रश्मि वर्मा की MRI रिपोर्ट में ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन डैमेज की पुष्टि हुई है। वर्तमान में उनका इलाज AIIMS के आईसीयू में चल रहा है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, हालांकि हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंचा मामला
घटना की जानकारी मिलते ही AIIMS प्रशासन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। उच्चस्तरीय समिति सभी तथ्यों, परिस्थितियों और जिम्मेदारियों की जांच करेगी।

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प्रताड़ना के आरोपों की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के HOD रहे डॉ. यूनुस पर पहले भी डॉक्टरों और स्टाफ के साथ कथित दुर्व्यवहार और मानसिक दबाव के आरोप लग चुके हैं। कार्यस्थल पर तनाव और प्रताड़ना के संभावित कारणों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। AIIMS प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संस्थान ने जताई संवेदनशीलता
AIIMS भोपाल प्रबंधन ने इस पूरे मामले पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि डॉ. रश्मि वर्मा के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। साथ ही, संस्थान में कार्यरत सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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