Thursday, August 20, 2026
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Nutan Sidar : ‘खाकी’ की साख सवालों के घेरे में, नूतन सिदार RTI विवाद बना सेंसरशिप का मुद्दा

Nutan Sidar : गौरी शंकर गुप्ता/धरमजयगढ़ (रायगढ़)। जशपुर के सहायक जनसंपर्क अधिकारी नूतन सिदार द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कथित बदनामी मामले ने पुलिस विभाग में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजपुर निवासी ऋषिकेश मिश्रा ने आरोप लगाया है कि नूतन सिदार ने उन्हें अपराधी बताते हुए बदनाम किया। शिकायत दिनांक 02.09.2025 को पुलिस अधीक्षक को भेजी गई थी, लेकिन अब तक न तो इस पर एफआईआर दर्ज हुई है और न ही परिवादी को कोई औपचारिक जानकारी दी गई है।

Nutan Sidar : मामले की गंभीरता इस बात से बढ़ती है कि लैलूंगा थाना, जो धरमजयगढ़ अनुविभाग के अंतर्गत आता है, ने परिवादी को सूचना देने में लगातार देरी की। इस संदर्भ में SDOP धरमजयगढ़ की भूमिका और मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि क्या नूतन सिदार को बचाने के इस पूरे ‘प्रोजेक्ट’ में अनुविभागीय कार्यालय की भी मूक सहमति शामिल थी।

Nutan Sidar : 31.10.2025 को जन सूचना अधिकारी (DSP, रायगढ़) ने मामले में हस्तक्षेप किया और स्पष्ट किया कि लैलूंगा थाने ने आवश्यक जानकारी नहीं दी। अब धारा 6(3) के तहत यह मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी SDOP धरमजयगढ़ को सौंपा गया है। DSP के पत्र ने सीधे तौर पर SDOP की जिम्मेदारी तय कर दी है और चेतावनी दी है कि 30 दिन के भीतर जानकारी नहीं देने पर धारा 5(4) के तहत हर्जाना और जिम्मेदारी स्वयं SDOP की होगी।

यह मामला सिर्फ एक RTI आवेदन का नहीं है, बल्कि उस वीआईपी कल्चर की भी पड़ताल कर रहा है जहाँ एक अधिकारी को बचाने के लिए पूरा सिस्टम आम नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी करता है। मामला अब SDOP की मेज पर बम बनकर टिक-टिक कर रहा है, और प्रशासनिक जिम्मेदारी की कसौटी पर खड़ा है।

Nutan Sidar : स्थानीय जनता और शिकायतकर्ता यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या कानून सबके लिए बराबर है या नूतन सिदार जैसे रसूखदारों के लिए अलग मानक लागू है। अब देखने वाली बात यह है कि SDOP धरमजयगढ़ इस नोटिस के बाद कार्रवाई करते हैं या मामले को अनसुने रहते हुए ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

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