रायपुर : छत्तीसगढ़ का खैरागढ़ जिला, जो फिलहाल MMC Zone पॉइंट सेंटर है, इन दिनों नक्सलियों के लिए सरेंडर का पसंदीदा क्षेत्र बन चुका है। इसका प्रमुख कारण जिले में चलाए जा रहे लगातार सर्च अभियान और ASP लक्ष्य शर्मा की माओवाद के खिलाफ बनाई गई रणनीति है।
जंगलों में हर चप्पे-चप्पे पर तैनात फोर्स ने नक्सलियों के लिए मुख्यधारा की ओर लौटने का रास्ता आसान बना दिया है। ऐसे में बीजापुर, सुकमा और अन्य माओवादी कैडरों के नक्सली खैरागढ़ जिले में शरण लेने और सरेंडर करने लगे हैं।
MMC Zone के जंगलों में सुरक्षा की सख्ती
इस MMC Zone के जंगलों में फोर्स की लगातार गश्त ने नक्सलियों के लिए खतरा बढ़ा दिया है। खैरागढ़ जिले के बकरकट्टा थाना क्षेत्र में हाल ही में एक नक्सली दंपत्ती ने सरेंडर किया। इस दंपत्ती पर बीस लाख रुपए का इनाम घोषित था।
ASP नितेश गौतम ने कहा कि नक्सलियों को सुरक्षा और मुख्यधारा में लौटने का भरोसा देने के लिए लगातार अपील की जा रही है। इस प्रयास के चलते खैरागढ़ जिले में अब तक कई नक्सली हिंसा की राह छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
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नक्सलवाद का अंत: खैरागढ़ का मॉडल
बस्तर क्षेत्र में अब नक्सलियों का सफाया करीब है। MMC Zone की रणनीति ने खैरागढ़ को नक्सलियों के लिए सेफ जोन बना दिया है। फोर्स की लगातार गश्त और प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान ने जंगलों में हिंसा की संभावना कम कर दी है।
खैरागढ़ का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जहां मुख्यधारा से भटके नक्सली सरेंडर और सुरक्षा की उम्मीद में आते हैं।
भविष्य की चुनौती
ASP नितेश गौतम और जिले की सुरक्षा टीम की अपील का असर अब और नक्सलियों के सरेंडर में दिखाई देगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में कितने और नक्सली खैरागढ़ जिले में आकर मुख्यधारा में लौटते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि MMC जोन गढ़चिरौली (महाराष्ट्र), बालाघाट (मध्य प्रदेश) और राजनांदगांव-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) के घने जंगलों को जोड़ता है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से उत्तरी और पश्चिमी इलाकों को दंडकारण्य कोर से जोड़ने वाला एक रणनीतिक मार्ग रहा है।













