The paper ‘poor’ : करोड़ों की संपत्ति, फिर भी BPL कार्ड : सेवानिवृत्त रेंजर का परिवार बन गया कागज़ी ‘गरीब’

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The paper ‘poor’ : रीवा। शासन और प्रशासन भले ही गरीबों के उत्थान के लिए योजनाएं बनाते रहें, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे भ्रष्ट लोग उन्हें पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला रीवा जिले की सिरमौर तहसील अंतर्गत दुलहरा गांव से सामने आया है, जहां वन विभाग के एक सेवानिवृत्त रेंजर के परिवार ने करोड़पति होने के बावजूद खुद को न सिर्फ कागजों में गरीब बना लिया, बल्कि गरीबी रेखा के नीचे (BPL) का खाद्यान्न और अन्य सुविधाएं भी लूट रहा है।

करोड़पति परिवार बना कागज़ी ‘गरीब’

सेवानिवृत्त रेंजर शोभानाथ नाथ पांडे के परिवार की संपत्ति और पृष्ठभूमि अत्यंत मजबूत है, फिर भी यह परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने का दावा कर रहा है।

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: शोभानाथ पांडे वन विभाग में रेंजर के पद से सेवानिवृत हुए हैं। उनका बेटा राम विनय पांडे सिरमौर न्यायालय में अधिवक्ता है। नातिन अनुराधा सीधी के शासकीय अस्पताल में बतौर नर्स सेवा दे रही है।

  • BPL कार्ड: इस पूरे संपन्न परिवार ने BPL परिवार आईडी क्रमांक 33150336 बनवा रखा है। इस आईडी में वकील बेटे राम विनय पांडे, बहू आरती, नाती अनुराग और शासकीय नर्स नातिन अनुराधा का नाम शामिल है।

  • गरीबों के खाद्यान्न पर डाका: इस अपात्रता के बावजूद यह परिवार गरीबों के लिए मिलने वाले सरकारी खाद्यान्न और सुविधाओं का लाभ उठा रहा है।

The paper ‘poor’ : सरकारी जमीनों पर भी अवैध कब्जा

शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि भूतपूर्व रेंजर और उनके परिवार का रसूख इतना है कि उन्होंने कई शासकीय जमीनों को भी अवैध रूप से अपने नाम करा लिया है।

  • बहु-राज्यीय संपत्ति: इस परिवार के नाम पर मध्य प्रदेश के खंडवा, सीधी, सिरमौर के दुलहरा, बलहरा सहित रीवा के बरा मोहल्ले में भी कई भूमियां हैं।

  • अवैध कब्ज़ा: भूतपूर्व रेंजर ने ग्राम बलहरा की शासकीय आराजी क्रमांक $8/2$ (रकबा $6.62$ एकड़), $47/2$ (रकबा $19$ डिसमिल) और ग्राम दुलहरा में शासकीय आराजी क्रमांक $1792/1/2$ (रकबा $.0133$ हेक्टेयर) के साथ $1793/1$ (रकबा $.101$ हेक्टेयर) को बिना किसी शासकीय आदेश के अपने नाम दर्ज करा लिया है।

The paper ‘poor’ : प्रशासन पर राजनीतिक रसूख के आगे घुटने टेकने का आरोप

शिकायतकर्ता शिवकुमार पांडे ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से लेकर तहसीलदार कार्यालय तक की है।

बाइट: शिवकुमार पांडे (शिकायतकर्ता): “हमने जिलाधिकारी से लेकर सभी जगह शिकायत की, लेकिन भूतपूर्व रेंजर के राजनीतिक रसूख और धन बल के सामने प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं। इतनी खुली लूट और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।”

इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि किस तरह से प्रभावशाली लोग सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं और प्रशासन केवल मूकदर्शक बना हुआ है।

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