पटना : बिहार की राजनीति यूँ तो हमेशा रंगीन रही है, लेकिन इस बार दीपक प्रकाश की कहानी सीधे “मतगणना से मंत्री तक” वाली कॉमिक ट्रैजेडी लग रही है। नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में RLM कोटे से मंत्री बने दीपक, इस चुनाव में सासाराम विधानसभा सीट पर एक निर्दलीय उम्मीदवार रामायण पासवान के लिए काउंटिंग RO बने थे।
जरा सोचिए, आप पूरी मेहनत कर वोट गिनते हैं और उम्मीदवार केवल 327 वोट पाता है, जबकि RO बने व्यक्ति खुद बाद में मंत्री पद तक पहुँच जाए। बिहार की राजनीति में यह दृश्य किसी ड्रामा सीरीज़ से कम नहीं।
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मां ने जीत दर्ज की, बेटे ने संभाला “सर्टिफिकेट”
सबसे मज़ेदार बात यह है कि दीपक की मां स्नेहलता कुशवाहा उसी सीट से RLM पार्टी के टिकट पर जीतकर विधायक बन गईं। यानी बेटे ने निर्दलीय उम्मीदवार के लिए वोट गिने, लेकिन खुद मंत्री बन गए, जबकि मां ने वोटों की गिनती में “हाथ नहीं डाला” और जीत हासिल कर ली।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दीपक का नाम रामायण पासवान के काउंटिंग RO के रूप में दर्ज है। उनके “संवेदनशील” कार्य ने चुनावी प्रक्रिया को बिल्कुल सुरक्षित रखा, लेकिन उम्मीदवार को मिले केवल 327 वोट, जिनकी जमानत भी जब्त हो गई।
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327 वोट और मंत्री पद – क्या तालमेल है!
निर्दलीय उम्मीदवार का प्रदर्शन रहा बेहद संतोषजनक नहीं, लेकिन दीपक प्रकाश ने अपनी राजनीतिक नौटंकी से खुद को मंत्री बना लिया। शनिवार को उन्होंने पंचायती राज मंत्री के तौर पर मंत्रालय में पदभार संभाला।
राजनीतिक गलियारों में यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय है कि काउंटिंग RO का काम संवेदनशील माना जाता है। और बिहार में, कभी-कभी, संवेदनशील काम करने वाला व्यक्ति सीधा मंत्री भी बन सकता है, भले ही उम्मीदवार की किस्मत 327 वोटों तक ही सीमित रहे।









