HAQ Review : नई दिल्ली : इमरान हाशमी और यामी गौतम स्टारर फिल्म ‘हक’ में कई ऐसे पल हैं, जो दर्शकों को महिलाओं के अधिकारों, उनकी जिंदगी और उनकी पहचान के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं। यह फिल्म प्यार, बेबसी और न्याय की एक बड़ी लड़ाई को खूबसूरती से पर्दे पर उतारती है।
‘हक’ की कहानी शाजिया बानो (यामी गौतम) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पति और जाने-माने वकील अब्बास खान (इमरान हाशमी) के खिलाफ अपने बच्चों के मुआवजे का मामला लेकर कोर्ट पहुंची हैं। फिल्म 1985 के ऐतिहासिक शाह बानो केस से प्रेरित है, जिसने तीन तलाक के खिलाफ उस जमाने में एक बड़ा फैसला सुनाया था।
जब शाजिया न्याय की मांग करती है और जज उसे ‘काजी के पास जाने’ को कहते हैं, तो वह एक तीखा सवाल उठाती है: “अगर मैंने किसी का खून किया होता तो भी आप यही कहते?” यह सवाल फिल्म के केंद्रीय विषय को सामने लाता है।
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अभिनय और निर्देशन
- यामी गौतम ने शाजिया बानो के किरदार को अत्यंत खूबसूरती से निभाया है। उनका प्यार, दर्द और आंसू सीधे दर्शकों के दिल में उतरते हैं, और उनकी परफॉर्मेंस तारीफ के लायक है।
- इमरान हाशमी अब्बास खान के किरदार में चमकते हैं। शाजिया और अब्बास की केमिस्ट्री इतनी खूबसूरत है कि अब्बास की बेवफाई से शाजिया के साथ-साथ दर्शक का दिल भी टूटता है।
- वर्तिका सिंह (दूसरी पत्नी सायरा), शीबा चड्ढा और दानिश हुसैन जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।
- डायरेक्टर सुपर्ण वर्मा ने इमोशन, महिला सशक्तिकरण और ड्रामा का संतुलन बनाए रखा है।
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छोटी बातें, गहरा असर
फिल्म की शुरुआत में शाजिया और अब्बास के बीच का गहरा प्यार दिखाया गया है, लेकिन तीन बच्चों के बाद उनके रोमांस में ठहराव आता है। वह दिन आता है जब अब्बास बानो से झूठ बोलकर दूसरी बीवी घर ले आता है।
फिल्म में एक छोटा सा सीन है, जिसमें नौकरानी बताती है कि अब्बास में सब्र नहीं है और एक कुकर खराब होने पर वह उसे ठीक करवाने के बजाय दूसरा ले आते हैं। समीक्षक के अनुसार, ऐसी ही छोटी-छोटी चीजें इस फिल्म को दमदार बनाती हैं, जो आगे चलकर बानो के साथ होने वाली घटना की ओर इशारा करती हैं।
‘हक’ किसी धर्म पर सवाल नहीं उठाती। यह हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई से दूर रहकर महिलाओं के अधिकार पर केंद्रित है। फिल्म में कुछ सीन्स थोड़े ड्रामेटिक हो सकते हैं और यह असल कहानी से कुछ अलग भी लगती है। लेकिन, कुल-मिलाकर यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें सोचने पर भी मजबूर करती है।
यह फिल्म 7 नवंबर से सिनेमाघरों में देखी जा सकती है।









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