UNEP Report 2025 : नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सभी देश अपनी जलवायु सुधार की प्रतिज्ञाओं को पूरी तरह से लागू भी करें, तो भी ग्लोबल तापमान 2100 तक 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। ये आंकड़ा पहले की भविष्यवाणियों से थोड़ा कम है, लेकिन तापमान में इस बढ़ोतरी से वर्तमान मौसम में बदलाव, भयानक आपदाएं और पर्यावरणीय संकट बढ़ने की संभावना है।
यूएनईपी की ‘एमिशन गैप रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, पेरिस समझौते के तहत तय 1.5 डिग्री का लक्ष्य अभी बहुत दूर है। अगले दशक में यदि देश जल्द कदम नहीं उठाते, तो तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री से ऊपर जा सकता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, यदि देशों की वर्तमान जलवायु नीतियां लागू रहती हैं, तो ग्लोबल तापमान 2.8 डिग्री तक पहुंच सकता है। हालांकि, अगर सभी देशों ने अपनी प्रतिज्ञाओं को लागू किया, तो तापमान 2.3-2.5 डिग्री तक बढ़ेगा।
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जी20 देशों का योगदान वैश्विक उत्सर्जन का 77% है, लेकिन ये भी अपने लक्ष्यों को पूरा करने में पीछे हैं। अमीर देशों ने गरीब देशों को मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो रहा।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रिकॉर्ड स्तर पर 57.7 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड तक पहुंच जाएगा, जो पिछले साल से 2.3% ज्यादा है। इस बढ़ोतरी का आधा हिस्सा जंगलों की कटाई और भूमि उपयोग परिवर्तन से आया है।
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भारत और चीन ने सबसे ज्यादा उत्सर्जन वृद्धि दर्ज की है, जबकि यूरोपीय संघ ने उत्सर्जन को कम करने में सफलता पाई है।
UNEP Report 2025 :
विशेषज्ञों की चेतावनी:
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जलवायु विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट को गंभीर चेतावनी बताया है। उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक उत्सर्जन में तेज और बड़े कटौती नहीं की गई, तो दुनिया एक भयंकर जलवायु संकट का सामना करेगी, जो गरीब और कमजोर देशों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा।
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नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ाना, जंगलों की रक्षा करना और जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल घटाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

UNEP Report 2025 :
अंतर्राष्ट्रीय स्थिति पर असर:
इस रिपोर्ट के आने के ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन होने जा रहा है, जहां विश्व नेताओं को इन चिंताओं पर चर्चा करनी है।
यूएनईपी ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अब हमें बिना देर किए कार्रवाई करनी होगी। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अगर अब कोई कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन अमीर देशों को नेतृत्व करते हुए आगे आना होगा।













