MP Latest News : भोपाल/ग्वालियर। दीपावली, रोशनी का त्योहार, इस साल मध्य प्रदेश में कैल्शियम कार्बाइड गन के कहर के कारण कई परिवारों के लिए अंधेरा लेकर आया। पीवीसी पाइप से बनी इन सस्ती देसी गन्स के विस्फोट से प्रदेशभर में करीब 300 लोग आँखों में गंभीर चोट के साथ घायल हुए हैं, और कई मामलों में स्थायी रूप से रोशनी जाने की आशंका है।
MP Latest News : 300 लोग घायल, 10 से अधिक को स्थायी क्षति की आशंका
MP Latest News : परंपरागत पटाखों के साथ बिकने वाली इन खतरनाक गन्स को कई परिवारों ने बच्चों की खुशी के लिए खरीदा, लेकिन यह रासायनिक प्रतिक्रिया से फटने वाला छोटा बम साबित हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले 30-40 सालों में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर इस तरह की चोटें देखी जा रही हैं। एक चौंकाने वाले आंकड़े के मुताबिक, राज्य में 10 से अधिक लोग अपनी आँखों की रोशनी स्थायी रूप से खो चुके हैं।
प्रमुख जिलों में घायलों की स्थिति:
| जिला | घायलों की संख्या (लगभग) |
| भोपाल | 150 |
| विदिशा | 50 |
| सीहोर | 28 |
| ग्वालियर | 19 |
| उज्जैन | 15 |
| इंदौर | 11 |
| अन्य जिले | (रायसेन, शिवपुरी, दतिया, श्योपुर, रतलाम) |
ग्वालियर में कॉर्निया क्षतिग्रस्त
ग्वालियर और आसपास के जिलों में भी इस गन का कहर सर्वाधिक रहा। दो-तीन दिन में यहाँ 19 युवा कार्बाइड गन से घायल हुए हैं। भिण्ड जिले के गोहद निवासी दो युवक सतेन्द्र गुर्जर और सूरज गुर्जर, जो ग्वालियर के डीडी नगर में घायल हुए, उनकी आँख का कॉर्निया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। गंभीर हालत के चलते सतेन्द्र को भोपाल एम्स रेफर किया गया है।
ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (जेएएच), जिला अस्पताल मुरार और निजी अस्पतालों में 8 से अधिक घायलों का ऑपरेशन किया गया है।
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डॉक्टरों की चेतावनी: यह छोटा बम है
जेएएच समूह के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. शाक्य ने बताया कि कैल्शियम कार्बाइड गन का कंटेंट काफी घातक है, जो सीधे कॉर्निया को क्षति पहुँचाता है और इसकी वजह से आँख का प्राकृतिक काला मोती सफेद पड़ने जैसा परिवर्तन भी देखा जा रहा है। घायल ओम नाम के एक मरीज ने बताया कि कार्बाइड वाला पटाखा चलाते ही फट गया, जिससे उनकी एक आँख में गंभीर चोट लगी और दिखना बंद हो गया।
डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि यह खिलौना नहीं, बल्कि विस्फोटक है जिससे आँखों पर लंबी अवधि का, कभी-कभी स्थायी असर हो रहा है। प्रशासन की तरफ से इन खतरनाक गन्स की बिक्री पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई है।











