वाड्रफनगर (बलरामपुर)। खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. हेमंत दीक्षित को लेकर उठे विवाद में नया मोड़ सामने आया है। मामूली और तुच्छ मुद्दों पर लगाए गए आरोपों को मेडिकल स्टाफ ने बेबुनियाद बताते हुए उनकी कार्यशैली की सराहना की है।
जांच टीम पर सवाल उठाना विभाग की गरिमा पर वार
कुछ लोग अब जिला स्तरीय जांच टीम की निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डॉ. दीक्षित वाकई इतना प्रभावशाली होते कि जांच टीम को प्रभावित कर सकते, तो क्या वह जांच के आदेश देने वाले उच्च अधिकारी को नहीं रोक सकते थे?
यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की साख पर हमला है।
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डॉ. दीक्षित की साख और कार्यशैली
डॉ. हेमंत दीक्षित को एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी माना जाता है। उन्होंने वाड्रफनगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुधार में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उनकी निष्ठा का उदाहरण यह है कि उन्होंने राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों सहित तमाम जरूरतमंदों को समर्पित होकर सेवा दी है।
मेडिकल स्टाफ का समर्थन
बलरामपुर के कलेक्टर को बड़ी संख्या में मेडिकल स्टाफ ने ज्ञापन सौंपकर डॉ. हेमंत दीक्षित पर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। इससे यह साफ होता है कि आरोप केवल एक सीमित समूह की साजिश हैं, न कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की राय।
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जनता का भी समर्थन
डॉ. दीक्षित के पक्ष में उठी आवाज़ यह दर्शाती है कि उनके विरोध में रची गई मुहिम केवल व्यक्तिगत स्वार्थ और साजिश पर आधारित है। आम जनता भी इसे देखकर सवाल उठा रही है कि क्या इतने लोग एक साथ गलत हो सकते हैं?
डॉ. हेमंत दीक्षित के खिलाफ चल रही यह मुहिम केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सा तंत्र के खिलाफ प्रतीत होती है। यह जरूरी है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो, साथ ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो विभाग और संस्था की प्रतिष्ठा को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।













