नई दिल्ली। : इस साल फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस को मिला है। स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को इसकी घोषणा की।
पुरस्कार उन्हें मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा स्तरों की खोज के लिए दिया गया है। क्वांटम टनलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें कण किसी बाधा (बैरियर) को पार कर जाते हैं, जबकि सामान्य भौतिक नियमों के अनुसार यह असंभव माना जाता है।
वैज्ञानिकों ने यह साबित किया कि क्वांटम इफेक्ट बड़े सिस्टम में भी दिखाई दे सकते हैं, यानी यह सिर्फ छोटे कणों तक सीमित नहीं है। इसके लिए उन्होंने 1984-85 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में दो सुपरकंडक्टर से बने एक बिजली सर्किट का प्रयोग किया। दोनों सुपरकंडक्टर के बीच पतली परत होने के बावजूद, चार्ज किए हुए कण उस परत को पार कर दूसरी तरफ जा सके, जो क्वांटम टनलिंग का प्रमाण है।
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इस खोज से क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपर सिक्योर कोड (क्वांटम क्रिप्टोग्राफी), हाई-स्पीड कंप्यूटर और सुपर-एक्यूरेट सेंसर जैसी तकनीकों के विकास में मदद मिलेगी। नोबेल कमेटी के अनुसार, 100 साल पुराना क्वांटम मैकेनिक्स आज भी विज्ञान में नई खोजों के लिए प्रेरणा देता है।
पूर्व भारतीय विजेता:
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सिर सी.वी. रमन (1930): रमन प्रभाव की खोज, लेजर और मेडिकल तकनीक में उपयोग।
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सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (1983): तारों के जीवन और ब्लैक होल के अध्ययन में योगदान।











