दीपक नामदेव/विदिशा : मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक ऐसा गांव है, जहां रावण को बाबा कहकर पूजा जाता है और ग्रामीण हर शुभ कार्य से पहले रावण बाबा की अर्चना करते हैं। यह गांव नटरेन तहसील में स्थित रावण गांव है।
गांव की खास बातें:
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रावण गांव में परमार काल का एक मंदिर है, जिसमें रावण की लेटी हुई विशाल पाषाण प्रतिमा स्थापित है।
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मंदिर में रावण की आरती और भजन प्रतिदिन दो समय होती है, और प्रसाद वितरण भी किया जाता है।
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विवाहित महिलाएं मंदिर के सामने से निकलते समय आज भी घूंघट पहनती हैं।
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गांव में किसी भी शुभ कार्य, शादी या नया वाहन खरीदने से पहले रावण बाबा की पूजा अनिवार्य मानी जाती है।
स्थानीय मान्यताएं और किवदंतियां:
- रावण बाबा के मंदिर से उत्तर दिशा में लगभग 3 किलोमीटर दूर बुद्धदेव की पहाड़ी है, जहां प्राचीन काल में बुद्धा नामक राक्षस रहा करता था। कहा जाता है कि उसने रावण बाबा से युद्ध करने की इच्छा जताई थी, लेकिन रावण बाबा की उपस्थिति देखकर उसका क्रोध शांत हो गया।
- मंदिर के पास स्थित तालाब में आज भी रावण की तलवार मौजूद मानी जाती है।
ग्रामीणों की बात:
- रामसेवक, दशरथ जैसे ग्रामीण बताते हैं कि रावण बाबा की पूजा गांव में प्रथम देवता के रूप में होती है।
- पुजारी नरेश महाराज के अनुसार, यहां प्रतिदिन आरती, भजन और प्रसाद का वितरण किया जाता है।
- महेश नामक ग्रामीण कहते हैं कि गांव के लोग रावण दहन के आयोजनों में भी शामिल नहीं होते क्योंकि उनके कुल देवता रावण बाबा हैं।
इस तरह, विदिशा का यह रावण गांव भारतीय परंपरा और लोकमान्यता का एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां रावण को देवता मानकर आदर और भक्ति के साथ पूजा जाता है।











