भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग 2 लाख दैनिक वेतन भोगी (दैवेभो) कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि अब दैवेभो कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिलेगा। कोर्ट ने आदेश लागू करने के लिए 60 दिन का समय निर्धारित किया है।
करीब 1,000 याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने यह अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण से पहले की 15 साल की सेवा अवधि को भी पेंशन के लिए मान्य किया जाएगा। इसका फायदा रिटायर हो चुके और भविष्य में रिटायर होने वाले सभी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को मिलेगा।
याचिकाकर्ताओं ने फरवरी 2023 में हुए भर्ती नियम (रूल-7) के संशोधन को चुनौती दी थी, जिसमें यह तर्क दिया गया कि दैवेभो कर्मचारियों की सेवा को पेंशन के लिए मान्यता नहीं दी जा रही थी। वकील एमपीएस रघुवंशी ने कहा कि चाहे नियम कुछ भी हों, दैवेभो कर्मचारियों को पेंशन मिलनी चाहिए और हाईकोर्ट का यह आदेश इसी पक्ष को मजबूत करता है।
अब तक प्रदेश में नियमित किए गए दैवेभो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन या अन्य लाभ नहीं मिलते थे। यह आदेश इस पुराने अवरोध को समाप्त करता है और कर्मचारियों के कल्याण में अहम साबित होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने भी 2024 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी बाद में नियमित होते हैं, तो उन्हें रिटायरमेंट के बाद पेंशन और अन्य लाभ मिलना चाहिए। हाईकोर्ट का यह आदेश इसी दिशा में कदम है।











