Sunday, August 16, 2026
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Sharadiya Navratri 2025 : इन 6 वास्तु नियमों का पालन किए बिना अधूरी रहेगी मां दुर्गा की पूजा

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Sharadiya Navratri 2025
Sharadiya Navratri 2025

Sharadiya Navratri 2025 : शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन 9 दिनों में देवी उपासना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि कुछ नियमों का पालन न किया जाए तो पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं नवरात्रि पर देवी उपासना के 6 अहम वास्तु नियम:

1. पूजा स्थल की दिशा
नवरात्रि पर कलश स्थापना और पूजा के लिए घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो तो उत्तर या पूर्व दिशा का चुनाव करें।

2. मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र
देवी की प्रतिमा या फोटो को उत्तर-पूर्व दिशा में रखें और साधक का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

3. पूजा स्थल की स्वच्छता
पूजा वाले कमरे में हर समय साफ-सफाई और पवित्रता बनी रहनी चाहिए। यहां गंदगी, भोजन या अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए।

4. कलश स्थापना का स्थान
कलश को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें और उसमें जटा नारियल और आम के पत्ते रखें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

5. आसन का महत्व
दुर्गा सप्तशती पाठ या देवी उपासना करते समय ऊन, कुशा या रेशमी कपड़े के आसन पर बैठें। बिना आसन के पूजा अधूरी मानी जाती है।

6. ध्यान और मंत्रोच्चार
ध्यान व मंत्रजाप के लिए भी ईशान कोण सर्वश्रेष्ठ है। यह दिशा मानसिक शांति और अध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।

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