ठाणे, महाराष्ट्र: ठाणे की एक अदालत ने 2018 में 11 साल की बच्ची के यौन शोषण के मामले में 32 वर्षीय दोषी संतोष भीमराव वानखेड़े को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस घटना के सात साल बाद आए इस फैसले में, अदालत ने अपराधी पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया है, जो अपील की अवधि समाप्त होने के बाद पीड़िता को दिया जाएगा।
पीड़िता की गवाही बनी आधार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी.एस. देशमुख ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अदालत ने आरोपी को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया।
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यह मामला 19 मई, 2018 का है, जब ठाणे के मुंब्रा इलाके से बच्ची अचानक गायब हो गई थी। पीड़िता की मां ने अदालत में बताया कि वह सुबह जब जागी, तो उसकी बेटी बिस्तर से गायब थी। बाद में, बच्ची घायल अवस्था में एक पहाड़ी से नीचे उतरती हुई मिली।
दरिंदगी और धमकी
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी संतोष वानखेड़े बच्ची को उसके घर से जबरन उठाकर पहाड़ी पर ले गया था। वहां उसने बच्ची के साथ मारपीट और यौन उत्पीड़न किया। आरोपी ने बच्ची को धमकी भी दी कि यदि उसने किसी को इस बारे में बताया तो वह उसके भाइयों को जान से मार देगा।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला
हालांकि, डरी-सहमी बच्ची ने हिम्मत दिखाते हुए मजिस्ट्रेट और अदालत दोनों के सामने एक ही बयान दिया, जिसमें कोई विरोधाभास नहीं था। न्यायाधीश ने बच्ची के बयान की सराहना करते हुए कहा कि उसके शब्द ही आरोपी की पहचान और अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त थे।
अदालत ने आरोपी के इस बचाव तर्क को खारिज कर दिया कि पीड़ित का परिवार उससे मकान खाली करने के लिए नाराज था। न्यायाधीश ने इसे “पूरी तरह से झूठा और निराधार” बताया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता को नियमों के अनुसार अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए मामले को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा जाए। यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।










