Tomar Brothers Case : रायपुर। राजधानी की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जून 2025 में मारपीट, वसूली, ब्लैकमेलिंग और सूदखोरी के 7 नए केस दर्ज होने के बाद भी कुख्यात ‘तोमर ब्रदर्स’ (वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर) पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। तीन महीने बीत जाने के बाद भी दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
Tomar Brothers Case : पुलिस सूत्रों का कहना है कि दोनों भाई लगातार स्थान बदल रहे हैं और फिलहाल मध्य प्रदेश में छिपे होने की आशंका है। चर्चाओं में यह भी है कि परिजनों से उनका संपर्क बना हुआ है।
पुलिस की ‘स्मार्ट’ इमेज पर दाग
चौंकाने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने हाल ही में पंजाब, यूपी, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र से 380 से ज्यादा अपराधियों को पकड़कर जेल भेजा, लेकिन रायपुर पुलिस अपने ही शहर के इन दो आरोपियों को खोजने में नाकाम रही है। जानकारों का मानना है कि राजनीतिक संरक्षण मिलने से कार्रवाई कमजोर पड़ी है।
पुलिस ने अब तक 150 से ज्यादा मोबाइल नंबर खंगाले, दोनों पर 5-5 हजार का इनाम रखा, कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुआ, लेकिन दोनों अब भी फरार हैं। लोअर कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका विचाराधीन है।
पुराने आपराधिक रिकॉर्ड
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वीरेंद्र तोमर: 2006 में चाकूबाजी, 2010 में मारपीट, 2013 में हत्या का मामला, 2017 में महिला को धमकी, 2019 में धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग समेत कई केस।
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रोहित तोमर: 2015 से 2019 के बीच अप्राकृतिक कृत्य, मारपीट, धमकी, सूदखोरी और ब्लैकमेलिंग के केस।
नई FIR और संपत्ति जब्ती
जून 2025 में तेलीबांधा और पुरानी बस्ती थाने में दर्ज 7 नए मामलों के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 35 लाख नकद, 70 तोला सोना, 125 ग्राम चांदी और चार लग्जरी गाड़ियां जब्त कीं। साथ ही भाठागांव में 1500 वर्गफीट की अवैध संपत्ति कुर्क कर अवैध निर्माण ढहाया गया।













