Suicide : पथानामथिट्टा। पथानामथिट्टा जिले के मूंगमपारा जंगल में 47 वर्षीय वी. टी. शिजो का शव फांसी पर लटका हुआ मिला। यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि उस सामाजिक और आर्थिक असमानता की तस्वीर है, जिसमें सपने और संसाधनों के बीच की खाई किसी की ज़िंदगी निगल जाती है।
पुलिस के अनुसार, शिजो के बेटे का चयन तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ था। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार कॉलेज की प्रवेश शुल्क नहीं जुटा पा रहा था। यही चिंता शिजो को अंदर तक तोड़ चुकी थी।
रिश्तेदारों ने बताया कि शिजो लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। उनकी पत्नी एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, लेकिन बीते 12 वर्षों से उनकी नियुक्ति पर विवाद चल रहा था। हाल ही में अदालत ने उनकी नियुक्ति को वैध ठहराया, जिसके बाद फरवरी 2025 से उनका वेतन मिलना शुरू हुआ। हालांकि, पिछले 12 वर्षों का बकाया वेतन अभी तक जारी नहीं किया गया, जिसकी फाइल जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में अटकी हुई है।
पुलिस को संदेह है कि शिजो की आत्महत्या का मुख्य कारण यही आर्थिक दबाव था। बेटे के उज्जवल भविष्य की उम्मीदें, कॉलेज में दाखिले की उम्मीद और सरकारी तंत्र की देरी—तीनों ने मिलकर एक संवेदनशील पिता को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
घटना के बाद शिजो के शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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यह घटना उन कई मामलों में से एक है, जहाँ आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा का सपना अधूरा रह जाता है। यह उन लोगों की भी जिम्मेदारी तय करने का समय है, जिनके कारण वर्षों से लंबित बकाया भुगतान नहीं हुआ और एक पिता को अपने बेटे का भविष्य अधूरा छोड़कर दुनिया से विदा लेना पड़ा।
सरकार को चाहिए कि वह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए एक प्रभावी और आपातकालीन सहायता प्रणाली विकसित करे, ताकि किसी की शिक्षा केवल पैसों की कमी के कारण न रुके, और कोई माता-पिता अपनी असमर्थता के कारण अपनी जान न दें।











