नई दिल्ली। Space Mission : भारत के अंतरिक्ष इतिहास में सोमवार को एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक धरती पर लौट आए। 18 दिन की इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद शुभांशु भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजे प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ के ज़रिए पृथ्वी पर पहुंचे। एक्सिओम-4 मिशन के तहत गए शुभांशु ने अंतरिक्ष में विज्ञान, तकनीक और भारत की ताकत का अनोखा परिचय दिया।
Space Mission : पीएम मोदी ने जताई खुशी, बताया ‘मील का पत्थर’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु की वापसी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा—
“मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूँ। उन्होंने अपने समर्पण और साहस से करोड़ों भारतीयों को प्रेरित किया है। यह गगनयान मिशन की दिशा में बड़ा कदम है।”
550 करोड़ के मिशन से भारत की अंतरिक्ष छलांग
इस अंतरिक्ष मिशन के लिए इसरो ने करीब ₹550 करोड़ का बजट निर्धारित किया था। यह मिशन भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम ‘गगनयान’ की तैयारी का अहम हिस्सा रहा है, जो 2027 में लॉन्च होना प्रस्तावित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शुभांशु का अनुभव इस मिशन को तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
अंतरिक्ष से भारत की नई पहचान
ग्रुप कैप्टन शुभांशु न केवल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले भारत के पहले व्यक्ति बने, बल्कि उन्होंने अंतरिक्ष में भारत की वैज्ञानिक साख को भी सशक्त किया। इस मिशन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत को अग्रणी देशों की श्रेणी में लाकर खड़ा किया है।
क्या किया शुभांशु ने अंतरिक्ष में?
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60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग: मेथी और मूंग के बीज उगाना, स्पेस माइक्रोएल्गी अध्ययन और हड्डियों की सेहत पर शोध।
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पृथ्वी की तस्वीरें: ISS के कपोला मॉड्यूल से ली गईं शानदार तस्वीरें।
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पीएम से संवाद: 28 जून को पीएम मोदी के साथ लाइव बातचीत, जिसमें ‘गाजर का हलवा’ भी चर्चा में रहा।
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छात्र संवाद: देश के तीन शहरों में 500 से अधिक छात्रों से हैम रेडियो के माध्यम से संवाद किया।
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ISRO से जुड़ाव: 6 जुलाई को ISRO के चेयरमैन के साथ प्रयोगों और गगनयान को लेकर विशेष चर्चा।
अब रिहैब फेज से गुजरेंगे शुभांशु
अंतरिक्ष से लौटने के बाद शुभांशु और उनकी टीम को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में ढलने के लिए सात दिन के पुनर्वास (rehabilitation) फेज से गुजरना होगा। यह चरण वैज्ञानिक निगरानी में होगा, ताकि शरीर फिर से सामान्य हालात में काम कर सके।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने शुभांशु
शुभांशु की यह यात्रा सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि भारत के युवा वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। अंतरिक्ष विज्ञान, टेक्नोलॉजी और आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का यह प्रयास निश्चित रूप से ऐतिहासिक माना जाएगा।









