Friday, August 21, 2026
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Gaganyaan India Mission : गगनयात्री शुभांशु शुक्ला की वापसी बनी थ्रिलर मूवी जैसी कहानी… हर मिनट में था खतरा! जाने पूरी कहानी…

#nishaanebaz.com
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Gaganyaan India Mission :  नई दिल्ली| भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अब सुरक्षित धरती पर लौट आए हैं। रविवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजे के तुरंत बाद, SpaceX की क्रू कैप्सूल ‘Grace’ ने कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के पास सफलतापूर्वक पानी में लैंडिंग की। ग्रुप कैप्टन शुक्ला, विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। लेकिन वह भारत के पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने $150 बिलियन डॉलर की लागत वाले ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) पर कदम रखा है।

पीएम मोदी ने कहा — “शुभांशु ने देश को गौरव दिया, करोड़ों सपनों को प्रेरणा दी”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा:
“मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं। उन्होंने अंतरिक्ष में भारत का परचम फहराया और करोड़ों सपनों को प्रेरणा दी। ये भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान ‘गगनयान’ की दिशा में एक और मील का पत्थर है।”

मिशन की जानकारी: 433 घंटे, 18 दिन, 288 ऑर्बिट और 12.2 लाख किलोमीटर

Axiom Space नामक निजी अंतरिक्ष कंपनी ने इस मिशन को NASA और ISRO के सहयोग से अंजाम दिया। इस यात्रा की लागत भारत के लिए लगभग 70 मिलियन डॉलर रही। Axiom के अनुसार:

  • कुल समय: 433 घंटे

  • कुल दिन: 18 दिन

  • पृथ्वी की कुल परिक्रमाएं: 288 बार

  • दूरी: 12.2 मिलियन किलोमीटर

इस अंतरिक्ष मिशन का नाम Axiom Mission 4 (Ax-4) था।

शुक्ला के साथ अंतरिक्ष गए ये अंतरराष्ट्रीय सदस्य

इस मिशन में चार सदस्य शामिल थे:

  1. ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (भारत)

  2. कमांडर पेगी विटसन (अमेरिका)

  3. स्लावोस उज्नांस्की-विस्निवस्की (पोलैंड)

  4. तिबोर कापू (हंगरी)

Axiom Space ने कहा कि यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए ऐतिहासिक था, क्योंकि इन देशों ने चार दशकों में पहली बार अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा और ISS पर जीवन और अनुसंधान में भाग लिया।

अंतरिक्ष में भारत के लिए किए 7 वैज्ञानिक प्रयोग

ISS में रहते हुए ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने भारत-विशिष्ट 7 सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोग किए, जिनका उद्देश्य:

  • दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्रा के लिए डेटा एकत्र करना

  • ग्रहों पर मानव बस्तियों के लिए वैज्ञानिक आधार बनाना

  • भारतीय स्पेस साइंस में नई दिशा देना

इन प्रयोगों से भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में क्षमताओं का प्रदर्शन हुआ।

भारत के लिए क्यों है ये उपलब्धि खास?

  • राकेश शर्मा (1984) के बाद अब भारत ने अंतरिक्ष में दूसरे भारतीय को भेजा है

  • ISS पर जाने वाले पहले भारतीय बने शुक्ला, जो अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे देशों के साथ इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो गए

  • इस मिशन से गगनयान की तैयारी को वैज्ञानिक और तकनीकी बढ़त मिलेगी

  • भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्पेस रिसर्च समुदाय का अहम सदस्य बनता जा रहा है

अब मेडिकल रीहैबिलिटेशन में रहेंगे शुक्ला

अंतरिक्ष से लौटने के बाद ग्रुप कैप्टन शुक्ला को लगभग एक सप्ताह तक मेडिकल रीहैबिलिटेशन में रखा जाएगा ताकि वे पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण परिस्थितियों के अनुरूप फिर से ढल सकें।

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