बैतूल। Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुख्यमंत्री के संभावित तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम से ठीक पहले वन विभाग की बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली गवासेन रेंज में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य करने वाले गरीब मजदूरों को पिछले 6 महीनों से उनके हक का पारिश्रमिक (मजदूरों का पैसा) नहीं मिला है। आरोप है कि गवासेन के डिप्टी रेंजर बाथम की मनमानी और कथित वरिष्ठ संरक्षण के चलते मजदूरों के पैसे का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गवासेन रेंज के अंतर्गत लगभग 10 से 15 गरीब मजदूर पिछले छह महीने से अपने पारिश्रमिक के भुगतान के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देकर उन्हें टरका रहे हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब यह बात सामने आई कि मजदूरों के हक का यह पैसा कथित तौर पर किसी अन्य के खाते में डालकर हड़प लिया गया है, जबकि वास्तविक रूप से मेहनत करने वाले मजदूर आज भी खाली हाथ हैं। इस मामले में सीएम हेल्पलाइन पर भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
बैतूल में तेंदूपत्ता मजदूरों के हक पर डाका? 6 महीने से 15 मजदूरों को नहीं मिला पारिश्रमिक, वन विभाग में मचा हड़कंप!
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 30, 2026
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विवाद बढ़ने और प्रदेश में मुख्यमंत्री के बैतूल दौरे की तैयारियों के बीच जब मामले ने तूल पकड़ा, तो पीसीसीएफ (PCCF) के निर्देश पर पूरा वन अमला हरकत में आया। आनन-फानन में अधिकारी और कर्मचारी तेंदूपत्ता संग्राहकों के पास पहुंचे और केवल कागजी आश्वासन देकर लौट आए। इस गंभीर मामले में जब मीडिया ने सीसीएफ (CCF) और डीएफओ (DFO) से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बचते नजर आए, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर और अधिक संदेह गहरा गया है।
पीड़ित मजदूरों—उषा चावला, संग्राहक महेश और फड़ मुंशी प्रकाश—ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि इस मामले की पारदर्शी जांच होती है, तो कई अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल, देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कड़ी कार्रवाई करते हैं और क्या गरीब मजदूरों को उनके परिश्रम का हक मिल पाता है।