रीवा। Nishaanebaz.com-Rewa-Sanjay-Gandhi-Hospital: मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही के खिलाफ लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ने वाले पीड़ित पिता ने अब सिस्टम से हारकर बेहद मार्मिक कदम उठाने की चेतावनी दी है। अपनी बेटी कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु को खोने वाले रामशिरोमणि मिश्रा ने न्याय न मिलने पर अब सीधे तौर पर इच्छामृत्यु की मांग उठाई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान जच्चा और बच्चे की संदेहास्पद मौत के साथ हुई थी। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल के जिम्मेदार लोगों की गंभीर लापरवाही के कारण उनकी बेटी और पोते की जान गई। इस दुखद घटना के बाद इंसाफ की आस में रामशिरोमणि मिश्रा ने अस्पताल प्रबंधन और दोषी जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर कड़ा संघर्ष किया था। न्याय पाने की जिद में उन्होंने लगातार 15 दिनों तक आमरण अनशन किया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।
रीवा में बेटी और नवजात को खोने वाले पिता ने न्याय न मिलने पर इच्छामृत्यु की मांग उठाई। 15 दिन के अनशन के बाद भी जांच पर सवाल।
#RewaNews #SanjayGandhiHospital #MedicalNegligence #MPNews #JusticeForKalpana #रीवा #मध्यप्रदेश #स्वास्थ्यव्यवस्था #न्यायकीमांग #अस्पताल https://t.co/yl9CocwDu8
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 28, 2026
प्रशासनिक स्तर पर जांच के लिए एक माह की निश्चित समय-सीमा तय की गई थी, जिससे पीड़ित परिवार को यह उम्मीद बंधी थी कि अब उन्हें दूध का दूध और पानी का पानी न्याय के रूप में मिल जाएगा। परिवार को भरोसा था कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक महीने का लंबा वक्त बीत जाने और निर्धारित समय-सीमा पूरी होने के बावजूद जब परिवार को जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनका सब्र टूट गया।
जांच रिपोर्ट और न्याय की स्थिति स्पष्ट न होने पर सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रशासनिक तंत्र फाइलों को दबाकर किसे बचाने की कोशिश कर रहा है। इसी असमंजस और लगातार मिल रहे धोखे से आहत होकर रामशिरोमणि मिश्रा एक बार फिर रीवा पहुंचे और सीधे जिला कलेक्टर से मुलाकात कर मामले में त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई। बेटी और नवजात बच्चे की अकाल मृत्यु का गहरा दर्द झेल रहे एक पिता द्वारा इच्छामृत्यु की मांग करना न केवल चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आम आदमी को न्याय पाने के लिए किस हद तक टूटना पड़ता है।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सबकी निगाहें रीवा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हुई हैं। यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या प्रशासन अब भी नींद से जागकर मजिस्ट्रियल जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक करता है और दोषियों पर शिकंजा कसता है, या फिर पीड़ित पिता को न्याय की गुहार लगाने के लिए एक बार फिर से सड़कों पर उतरकर कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा।