बैतूल। Nishaanebaz.com-Betul Forest Scam: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली चिचोली रेंज से सरकारी बजट के दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर वित्तीय फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ के तहत आवंटित लाखों रुपये के बजट को ठिकाने लगाने में स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि डीएफओ के संरक्षण के चलते मैदानी अमले ने कागजों में तो पौधे लगा दिए, लेकिन धरातल पर पौधे गायब हैं और दूर-दूर तक केवल घास ही नजर आ रही है।
कागजों पर वृहद पौधारोपण, जमीन पर केवल लहलहा रही घास
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान ग्रीन इंडिया मिशन योजना के तहत चिचोली रेंज के खामापुर सर्कल अंतर्गत गुल्लरढाना बीट के जंगल कंपार्टमेंट में बड़े पैमाने पर पौधारोपण का कार्य स्वीकृत किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण करना और जंगलों का घनत्व बढ़ाना था। लेकिन जब धरातल पर सच्चाई टटोली गई, तो स्थिति इसके ठीक विपरीत मिली। डीएफओ के कथित संरक्षण के चलते खामापुर सर्कल के डिप्टी रेंजर और संबंधित नाकेदार ने इस योजना में जमकर अनियमितताएं की हैं। पौधों की सुरक्षा, रखरखाव और उनकी बढ़वार के लिए जरूरी वीडिंग (निंदाई-गुड़ाई) का कार्य कराए बिना ही लाखों रुपये की राशि डकार ली गई। नतीजा यह है कि आज उस कंपार्टमेंट में पौधे ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं, बल्कि हर तरफ सिर्फ बड़ी-बड़ी घास लहलहा रही है।
ग्रामीणों में असंतोष, क्या पीसीसीएफ और मुख्य वन संरक्षक लेंगे संज्ञान?
इस बड़े वित्तीय घोटाले के उजागर होने के बाद स्थानीय निवासियों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों में वन विभाग के खिलाफ गहरा असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि भोपाल स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और मुख्य वन संरक्षक इस उजागर हुए फर्जीवाड़े पर क्या सख्त रुख अपनाते हैं। क्या डीएफओ के संरक्षण में चल रहे इस खेल की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी, या फिर कागजी खानापूर्ति कर भ्रष्ट डिप्टी रेंजर और नाकेदार को बचाने का प्रयास किया जाएगा? बैतूल जिले के इस बहुचर्चित मामले पर अब सबकी निगाहें उच्चाधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
