IGKV Paper Leak: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय यानी IGKV से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर एक और बड़ा मामला सामने आया है। BSc फर्स्ट ईयर के फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स विषय के पेपर के लीक होने का दावा किया जा रहा है। अगर यह दावा सही पाया जाता है, तो यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
आईजीकेवी पेपर लीक को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार यह मामला 19 अगस्त को हुई परीक्षा से जुड़ा है। BSc फर्स्ट ईयर का फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स का पेपर उस दिन सुबह 10 बजे होना था। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से कई घंटे पहले ही प्रश्नपत्र बाहर पहुंच गया था।
सुबह 4 बजे पेपर लीक होने का आरोप
IGKV Paper Leak News में सबसे चौंकाने वाली बात पेपर के समय को लेकर सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि प्रश्नपत्र सुबह करीब 4 बजे लीक हो गया था। यानी अगर इस दावे की पुष्टि होती है, तो परीक्षा शुरू होने से करीब 6 घंटे पहले पेपर बाहर पहुंच चुका था।
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100 फीसदी सवाल मैच होने का दावा
आईजीकेवी परीक्षा पेपर लीक मामले में दावा है कि सुबह सामने आए प्रश्नपत्र और सुबह 10 बजे परीक्षा में पूछे गए सवालों में पूरा मिलान था। आरोप लगाने वालों के मुताबिक परीक्षा में 100 प्रतिशत सवाल वही आए, जो कथित तौर पर पहले ही लीक हो चुके थे।
फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स का था पेपर
IGKV BSc Paper Leak से जुड़ा यह मामला BSc फर्स्ट ईयर के फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स विषय का बताया जा रहा है। इस पेपर की परीक्षा 19 अगस्त को सुबह 10 बजे आयोजित होनी थी। फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर पेपर लीक के दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
पहले भी पेपर लीक के आरोपों से जुड़ा विवाद
आईजीकेवी पेपर लीक मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह तीसरे पेपर के लीक होने का दावा बताया जा रहा है। इससे परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर छात्रों के बीच चिंता बढ़ सकती है। छात्रों की ओर से मामले की जांच और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने की मांग उठ सकती है।
छह घंटे पहले पेपर पहुंचने से उठे सवाल
IGKV Exam Paper Leak के दावे ने प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रश्नपत्र वास्तव में परीक्षा से छह घंटे पहले बाहर आया था, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि पेपर किस स्तर पर और किस माध्यम से बाहर पहुंचा।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी सच्चाई
आईजीकेवी पेपर लीक न्यूज में फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि इन आरोपों की आधिकारिक जांच हो। केवल वायरल पेपर या छात्रों के दावे के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। कथित लीक पेपर और परीक्षा में पूछे गए सवालों का मिलान, पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला
IGKV Paper Leak Case का असर सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं है। अगर पेपर लीक होने की पुष्टि होती है, तो परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच निष्पक्षता को लेकर सवाल उठेंगे। ऐसे में यूनिवर्सिटी के लिए जरूरी होगा कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करे।फिलहाल आईजीकेवी पेपर लीक को लेकर सबसे बड़ा दावा यही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से करीब छह घंटे पहले यानी सुबह 4 बजे लीक हुआ और सुबह 10 बजे हुई परीक्षा में कथित तौर पर 100 प्रतिशत सवाल मैच हुए। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।





