भोपाल। Nishaanebaz.com-MP Power Cut Controversy: मध्य प्रदेश में इन दिनों गहराए बिजली संकट को लेकर सरकार के भीतर ही असहज स्थिति बनती नजर आ रही है। हाल ही में हुई राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक के दौरान ऊर्जा विभाग के प्रेजेंटेशन के बाद मंत्रियों ने बिजली कटौती के तौर-तरीकों पर खुलकर सवाल खड़े कर दिए। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों से पूछा कि जब शहरी इलाकों में बिजली की कोई बड़ी समस्या नहीं है, तो आखिर ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में ही बार-बार कटौती क्यों की जा रही है?
मंत्रियों ने उठाए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती के मुद्दे गुरुवार को हुई ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान बिजली संकट का मुद्दा गरमाया रहा। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के अलावा महिला एवं बाल विकास मंत्री किरण सिंह वर्मा समेत अन्य कई मंत्रियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में बिजली कटौती की गंभीर समस्या को उठाया। मंत्रियों का कहना था कि ग्रामीण जनता लगातार इस बात को लेकर परेशान है और सरकार को इस असमानता पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
कम बारिश और धान की बोआई बनी संकट की मुख्य वजह: सीएम मोहन यादव मंत्रियों के तीखे सवालों और असंतोष पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस साल मानसून के दौरान कम बारिश होने के कारण बिजली उत्पादन और सप्लाई दोनों पर असर पड़ा है। इसके अलावा, धान की बोआई का सीजन होने के चलते कृषि क्षेत्रों में अचानक बिजली की मांग में भारी इजाफा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि राज्य में बिजली की कमी को दूर करने के लिए केवल गुजरात से ही नहीं, बल्कि पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी बिजली लेने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि अगले एक-दो दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ जाएंगे।
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अगस्त-अक्टूबर तक मिलेगी राहत, 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली का दावा प्रदेश में हो रही बिजली की किल्लत को लेकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का भी बयान सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि तकनीकी खराबी के साथ-साथ कम बारिश के कारण भी बिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, ऊर्जा विभाग के आंकड़ों और दावों के मुताबिक, आगामी सप्ताह तक राज्य को करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो सकती है, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली आपूर्ति को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।
