गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। Nishaanebaz.com-Villagers Back Proposed B.S. Sponge Unit: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले अंतर्गत तमनार तहसील के ग्राम बड़गांव में प्रस्तावित B.S. Sponge (बी.एस. स्पंज) उद्योग की स्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। क्षेत्र में उद्योग स्थापना के विरोध की खबरों के बीच अब बड़गांव के ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग उद्योग के समर्थन में खुलकर सामने आ गया है। कंपनी द्वारा उद्योग स्थापना के उद्देश्य से खरीदी गई लगभग 160 एकड़ भूमि पर सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) निर्माण और संयंत्र की स्थापना को लेकर ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/SDM) के समक्ष अपना औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया है।
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रोजगार और क्षेत्रीय विकास की जगी बड़ी उम्मीद एसडीएम को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण अंचल में वर्तमान समय में आजीविका और स्थायी रोजगार के साधन बेहद सीमित हैं। ऐसे में लगभग 160 एकड़ में स्थापित होने वाले इस बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को सीधे रोजगार मिलने तथा ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार होने की प्रबल संभावना है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि उद्योग स्थापित होने से न केवल व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी, बल्कि सीएसआर (CSR) मद के माध्यम से गांव में पक्की सड़क, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो सकेगा।
बाउंड्रीवॉल निर्माण में आ रही बाधाएं दूर करने की मांग आवेदन में ग्रामीणों ने उल्लेख किया है कि उद्योग प्रबंधन द्वारा अपनी अधिग्रहित व क्रय की गई भूमि की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल निर्माण का काम शुरू कराया गया है। इस निर्माण कार्य में वर्तमान में स्थानीय ग्रामीणों को ही मजदूरी और रोजगार दिया जा रहा है, जिससे कई परिवारों को तत्काल आय का जरिया मिल सका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ असामाजिक या बाहरी व्यक्तियों द्वारा निर्माण कार्य में बेवजह अड़ंगा लगाया जा रहा है और बाधा उत्पन्न की जा रही है। समर्थकों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नियमानुसार निर्माण कार्य में आ रही रुकावटों का तुरंत समाधान किया जाए।
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‘पूरे गांव की राय के नाम पर हमारा पक्ष नजरअंदाज न हो’ प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखते हुए ग्रामीणों ने साफ कहा कि कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे विरोध को पूरे गांव का सामूहिक फैसला न माना जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योग स्थापना के समर्थन में खड़ा वर्ग भी गांव का ही हिस्सा है, इसलिए उनके पक्ष को भी प्रशासनिक स्तर पर समान महत्व दिया जाना चाहिए।
हालांकि, ग्रामीणों ने यह अपेक्षा भी जताई है कि उद्योग प्रबंधन को भी वैधानिक प्रक्रिया, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। साथ ही स्थानीय युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा। फिलहाल, ग्रामीणों के इस कदम के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे की कार्यवाही पर टिक गई हैं।


