इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore Municipal Corporation Strike Controversy: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम सफाई कर्मचारियों की हालिया हड़ताल के समाप्त होने के साथ ही एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हड़ताल अचानक खत्म होने से वाल्मीकि समाज की विभिन्न पंचायतों और सफाईमित्रों के बीच तीखी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रदर्शनकारियों और समाज के एक वर्ग ने सीधे तौर पर समाज के कुछ ठेकेदारों और नेताओं पर बिना सहमति के और अपनी व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि के लिए हड़ताल को समाप्त करवाने का गंभीर आरोप लगाया है।
विवाद की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि आंदोलनरत सफाईमित्रों को नौकरी से निकाले जाने और सेवा समाप्त किए जाने का भय दिखाकर हड़ताल को दबाव में वापस लिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिन नेताओं और ठेकेदारों को समाज के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए थी, उन्होंने ही प्रशासन के साथ मिलकर पीठ में छुरा घोंपा है। इस बीच, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे इंजीनियर संतोष कल्याणे के आह्वान पर शहर के प्रमुख रीगल चौराहे (Regal Square) पर एक तीखा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान वाल्मीकि समाज के भीतर उपजे आक्रोश का इजहार एक अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से किया गया। आंदोलनकारियों ने समाज के उन कथित नेताओं और ठेकेदारों के नाम पर अपना सिर मुंडवाकर (मुंडन करवाकर) अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिन्होंने सफाई कर्मचारियों के हितों के साथ कथित तौर पर समझौता किया था। प्रदर्शन के दौरान समाज के इन नेताओं को ‘समाज का गद्दार’ करार दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंदौर के सफाई मजदूरों और वाल्मीकि समाज के संगठनों के बीच आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। हालांकि प्रशासन इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के बीच पनप रहा यह असंतोष आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सफाईमित्रों के भविष्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा।

