वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के बीच कांकेर में मानव सुरक्षा पर सवाल, भालू-तेंदुओं के बढ़ते आतंक से दहशत में ग्रामीण, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बसंत यादव बोले—वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी, लेकिन इंसानों की सुरक्षा की भी गारंटी दे सरकार

Sanjay Sahu
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह

Kanker News: कांकेर। एक ओर वन विभाग द्वारा माकड़ी स्थित प्रशिक्षण केंद्र में राज्य स्तरीय वन्यजीव संरक्षण सप्ताह मनाकर वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कांकेर शहर और आसपास के क्षेत्रों में भालू एवं तेंदुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही ने मानव सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर से लगे कई गांवों में आए दिन वन्यप्राणी आबादी के बीच पहुंच रहे हैं। कभी भालू घरों तक पहुंच रहे हैं तो कभी पालतू जानवरों को अपना शिकार बना रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है कि वन्यप्राणियों की लगातार मौजूदगी के कारण अब उन्हें खेतों और जंगल से लगे इलाकों में जाने में भी डर लगने लगा है। कई लोग सुबह-शाम घर से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी वन विभाग और सरकार की बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

बसंत यादव ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस जिला अध्यक्ष बसंत यादव ने वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के बीच भाजपा सरकार और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए सप्ताह मना रही है, वन्यजीवों के संरक्षण की बात कर रही है, इससे किसी को आपत्ति नहीं है। वन्यप्राणियों का संरक्षण होना चाहिए, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वन्यप्राणियों के बीच रहने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं या नहीं।

बसंत यादव ने कहा कि कांकेर और चारामा सहित शहर के आसपास के क्षेत्रों में आए दिन भालू और तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। वन्यप्राणी भोजन की तलाश में रहवासी क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं और कई बार घरों में घुसने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। पालतू पशुओं के साथ-साथ लोगों पर हमले की घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

‘लोग घरों से निकलने में घबरा रहे हैं’

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि आज स्थिति ऐसी बन रही है कि लोग अपने ही घर और गांव में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि कब और कहां से भालू या तेंदुआ सामने आ जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वन विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए कोई ठोस और प्रभावी योजना बनाई है?

उन्होंने कहा कि केवल वन्यजीव संरक्षण सप्ताह मनाने और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। संवेदनशील गांवों में नियमित गश्त, वन्यप्राणियों की निगरानी, तत्काल रेस्क्यू टीम और आबादी में प्रवेश करने वाले वन्यप्राणियों से लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है।

‘वन्यजीवों को बचाइए, लेकिन इंसानों को भी सुरक्षित रखिए’

बसंत यादव ने कहा कि कांग्रेस को वन्यप्राणियों के संरक्षण से कोई दिक्कत नहीं है। वन्यजीव भी सुरक्षित रहें और जंगल भी सुरक्षित रहें, लेकिन इसके साथ सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि आम नागरिक सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि वन्यप्राणियों का संरक्षण और मानव सुरक्षा एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाना सरकार और वन विभाग की जिम्मेदारी है।

Kanker News: उन्होंने मांग की कि कांकेर शहर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यप्राणियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाए तथा भालू और तेंदुओं के आबादी क्षेत्र में आने की घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी एवं प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। उनका कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय सरकार को पहले से ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे लोगों की जान पर खतरा ही न आए।

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