बैतूल। Nishaanebaz.com-Betul Forest Department Sand Seizure: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के पश्चिम वन मंडल से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। पश्चिम वन मंडल की गवासेन रेंज के अंतर्गत आने वाले वन ग्राम टांडा के पास वन अमले ने अवैध रेत का परिवहन कर रहे बिना नंबर के 3 ट्रैक्टरों को पकड़ा है। हालांकि, ट्रैक्टर पकड़े जाने के बाद कार्रवाई को लेकर कई तरह के संशय पैदा हो गए हैं, क्योंकि वन विभाग ने वन अपराध दर्ज करने के बजाय पूरे मामले को कागजी औपचारिकता पूरी कर राजस्व विभाग को सौंप दिया, जबकि इस कार्रवाई की पूर्व सूचना राजस्व अमले को नहीं दी गई थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नियम के मुताबिक वन क्षेत्र से रेत का अवैध परिवहन सीधे तौर पर गंभीर वन अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें वाहन राजसात करने तक का कड़ा प्रावधान है। लेकिन विभाग द्वारा इस मामले को राजस्व के पाले में डाल दिए जाने से यह चर्चा तेज हो गई है कि विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए अवैध कारोबारियों को कम जुर्माने के साथ बचाने का रास्ता साफ कर दिया है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि गवासेन रेंज में एक बार फिर से पदस्थ किए गए डिप्टी रेंजर बाथम के कार्यकाल में अवैध रेत का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।
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सूत्रों का दावा है कि पकड़े गए तीनों ट्रैक्टर सत्ताधारी दल से जुड़े रसूखदार लोगों के हैं, जिसके चलते विभाग ने वन अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने से परहेज किया है। यदि वन विभाग की नीयत साफ होती, तो मामला राजस्व को सौंपने के बजाय सीधे वन अधिनियम के तहत दर्ज किया जाता। ग्रामीणों का आरोप है कि टांडा क्षेत्र में की गई यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे और खानापूर्ति के लिए है, ताकि मीडिया और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को शांत किया जा सके।
इस पूरे मामले में जब जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो एसडीओ कन्हैया कुमार ने घटनाक्रम को लेकर विभाग का पक्ष रखा। वहीं, ग्रामीणों का साफ कहना है कि असली कार्रवाई तभी मानी जाएगी जब रेत माफियाओं और अवैध वाहनों पर वन अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मुख्य वन संरक्षक इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं या जिला वनाधिकारी के संरक्षण में इस तरह की लीपापोती का दौर जारी रहता है।






