Saturday, October 3, 2026
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एक्सीडेंट के बाद कार के इन पार्ट्स का बिल देख उड़ जाएंगे होश! इंश्योरेंस क्लेम से पहले जान लें पूरी बात

Car Insurance Claim: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- कार चलाते समय छोटी खरोंच या हल्का डेंट लगना आम बात है। लेकिन जब एक्सीडेंट जोरदार हो, तो नुकसान सिर्फ कार की बाहरी बॉडी तक सीमित नहीं रहता। कई बार ऐसे पार्ट्स भी टूट जाते हैं, जिन्हें बदलने या ठीक कराने में काफी पैसा खर्च हो सकता है।यही वजह है कि कार खरीदने के साथ सही इंश्योरेंस लेना भी जरूरी है। हालांकि, किसी हादसे के बाद कितना खर्च इंश्योरेंस से कवर होगा, यह पॉलिसी के नियम, कवरेज, डिडक्टिबल और कार की स्थिति पर निर्भर करता है।

एक्सीडेंट में सबसे पहले कार के बाहरी हिस्सों को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। बंपर, फेंडर, बोनट, दरवाजा और पीछे का ढक्कन जैसे हिस्से टक्कर में टूट या दब सकते हैं।हल्की खरोंच या डेंट होने पर कई बार इन्हें ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर नुकसान ज्यादा हो तो पूरा पार्ट बदलना पड़ सकता है। इसके अलावा पेंट और सर्विस का खर्च भी जुड़ जाता है।

हेडलाइट और टेललाइट भी हो सकती हैं महंगी
आज की नई कारों में सामान्य बल्ब की जगह एलईडी और कई तरह की स्मार्ट लाइटिंग तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें सिर्फ रोशनी देने वाला हिस्सा ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी जुड़े हो सकते हैं।इसलिए किसी हादसे में हेडलाइट या टेललाइट टूटने पर सिर्फ बाहरी कवर बदलने से काम नहीं चलता। पूरा यूनिट बदलने पर बिल काफी बढ़ सकता है।

विंडशील्ड टूटने पर सेंसर भी बढ़ा सकते हैं खर्च
एक्सीडेंट में विंडशील्ड टूटना भी आम नुकसान में शामिल है। अगर कांच में मामूली नुकसान है तो कुछ मामलों में मरम्मत संभव हो सकती है, लेकिन बड़ी दरार या टूटने पर पूरा विंडशील्ड बदलना पड़ सकता है।नई कारों में विंडशील्ड के साथ कैमरा और सेंसर भी लगे हो सकते हैं। ऐसे में नया कांच लगाने के बाद सेंसर की सही कैलिब्रेशन भी जरूरी हो सकती है, जिससे कुल खर्च और बढ़ जाता है।
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टायर और अलॉय व्हील का खर्च भी कम नहीं
तेज टक्कर, बड़े गड्ढे या सड़क किनारे किसी चीज से जोरदार टकराने पर टायर और अलॉय व्हील दोनों खराब हो सकते हैं। अलॉय व्हील मुड़ने या टूटने पर उसे बदलना पड़ सकता है।प्रीमियम कारों में बड़े आकार के अलॉय और महंगे टायर इस्तेमाल होते हैं। ऐसे वाहनों में सिर्फ एक पहिए को हुए नुकसान का खर्च भी सामान्य कार की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है।

बड़े हादसे में इंजन और अंदर के पार्ट्स भी खतरे में
जोरदार एक्सीडेंट होने पर नुकसान कार की बाहरी बॉडी तक सीमित नहीं रहता। इंजन, रेडिएटर, सस्पेंशन, एयरबैग और दूसरे मैकेनिकल व इलेक्ट्रॉनिक हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं।इनमें से कई पार्ट्स महंगे होते हैं। इसलिए बड़े हादसे के बाद मरम्मत का बिल हजारों रुपये से बढ़कर लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। एयरबैग जैसे सुरक्षा उपकरणों को बदलने का खर्च भी कई मामलों में काफी अधिक हो सकता है।

इंश्योरेंस से मिल सकती है आर्थिक राहत
कार इंश्योरेंस ऐसे ही बड़े खर्च के समय आर्थिक मदद दे सकता है। लेकिन क्लेम की रकम पॉलिसी में शामिल कवरेज, डिडक्टिबल, कार की उम्र, नुकसान और अन्य शर्तों पर निर्भर करती है।इसलिए सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी लेना सही तरीका नहीं है। पॉलिसी खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि एक्सीडेंट में कौन-कौन से नुकसान कवर होंगे और किन परिस्थितियों में क्लेम सीमित या खारिज हो सकता है।

पॉलिसी लेते समय इन बातों पर दें ध्यान
कार इंश्योरेंस खरीदते समय पॉलिसी का कवरेज, डिडक्टिबल, बीमा राशि और अतिरिक्त सुविधाओं की जानकारी जरूर समझें। साथ ही यह भी देखें कि क्लेम की स्थिति में किन दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जरूरत होगी।कुल मिलाकर, एक्सीडेंट के बाद सिर्फ बंपर या दरवाजे का खर्च ही नहीं बढ़ता। हेडलाइट, विंडशील्ड, टायर, अलॉय व्हील, एयरबैग, सस्पेंशन और इंजन जैसे हिस्से भी रिपेयर बिल को काफी बढ़ा सकते हैं। सही इंश्योरेंस कवरेज ऐसी स्थिति में जेब पर पड़ने वाले बड़े आर्थिक बोझ को कम करने में मदद कर सकता है।

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