Mahanadi Dispute : रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
सीएम साय ने कहा कि महानदी केवल पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि दोनों राज्यों के लोगों के जीवन, खेती और विकास से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली जीवनधारा है। इसलिए इस मुद्दे का समाधान बातचीत, आपसी सहमति और सहयोग से होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ ने रखा अपना पक्ष
बैठक में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और राज्य में इसका बड़ा जलग्रहण क्षेत्र है। खेती, सिंचाई, पेयजल और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतें महानदी से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन जरूरतों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की जरूरतों का सम्मान करता है। उन्होंने हीराकुंड जलाशय के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके सुचारू संचालन के लिए छत्तीसगढ़ सहयोग की भावना से आगे बढ़ने को तैयार है।
वैज्ञानिक आधार पर समाधान की बात
सीएम साय ने कहा कि महानदी से जुड़े फैसले केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर होने चाहिए। जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरण और दोनों राज्यों की भविष्य की जरूरतों का अध्ययन कर समाधान तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी आकलन और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता पर भरोसा जताया। जुलाई 2026 में भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें बातचीत और तकनीकी सहयोग के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया था।
2018 से न्यायाधिकरण में मामला
महानदी जल बंटवारे का विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है। 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इसके साथ ही दोनों राज्यों के बीच केंद्रीय जल आयोग के स्तर पर तकनीकी बातचीत भी जारी रही है।
हाल के महीनों में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच भी बातचीत हुई है। 20 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच भुवनेश्वर में महानदी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद केंद्र की पहल पर 1 अक्टूबर की बैठक आयोजित की गई।
महानदी को सहयोग की धारा बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के लोगों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं और महानदी भी इस साझा विरासत का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों का उद्देश्य किसानों और आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकालना होना चाहिए, जिससे जल से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान हो सके और भविष्य में दोनों राज्यों के बीच सहयोग बढ़े।
Mahanadi Dispute : बैठक में दोनों राज्यों के अधिकारियों ने भी महानदी के जल बंटवारे और प्रबंधन से जुड़े तकनीकी विषयों पर चर्चा की। आगे भी राजनीतिक और तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहने की बात कही गई है।






