इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore NEET Protest Student Disappointment: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों तक चले ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की गूंज एक बार फिर सुनाई दी है। इंदौर में दिल्ली के ‘जंतर-मंतर’ जैसा अभूतपूर्व आंदोलन खड़ा करने वाली छात्र टीम की सदस्य छात्राएं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बड़ी उम्मीदों के साथ पहुंची थीं। छात्रों को आशा थी कि वे अपने 26 दिनों के लंबे संघर्ष की दास्तान और नीट पीड़ितों की मांगों को सीधे राहुल गांधी के समक्ष रख सकेंगी, लेकिन मुलाकात न हो पाने से उन्हें भारी निराशा हाथ लगी है।
आंदोलन से जुड़ी स्थानीय छात्रा ने बताया कि इंदौर में नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों और अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर 26 दिनों तक लगातार धरना-प्रदर्शन किया था, जिसने शहर में आंदोलन का एक नया इतिहास रचा था। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर पूरी टीम इस उम्मीद में इंदौर के कार्यक्रम स्थल पहुंची थी कि राहुल गांधी अपने संबोधन में इस 26 दिवसीय आंदोलन का कम से कम एक छोटा सा उल्लेख करेंगे या उनसे व्यक्तिगत मुलाकात कर छात्रों की पीड़ा सुनेंगे, जिससे उनकी आवाज राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद हो सके।
हालांकि, सुरक्षा कारणों और व्यस्त कार्यक्रम के चलते नीट आंदोलनकारी छात्रों की राहुल गांधी से मुलाकात संभव नहीं हो सकी और न ही मंच से इंदौर के उस 26 दिवसीय आंदोलन का कोई जिक्र हुआ। मुलाकात का अवसर न मिलने पर छात्राओं ने मीडिया के सामने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि इंदौर के ‘दूसरे जंतर-मंतर’ की जमीनी सच्चाई और छात्रों का संघर्ष शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाया, जिसका उन्हें गहरा दुख है।
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मुलाकात न होने का मलाल जाहिर करने के साथ ही छात्रा ने राहुल गांधी के संबोधन और उनकी नीयत की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने युवाओं, बेरोजगारों और छात्रों के हितों में कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि देश का युवा बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के संघर्ष कर रहे नेताओं से ही उम्मीदें लगाता है और राहुल गांधी से भी छात्रों को काफी उम्मीदें हैं। 26 दिन तक आंदोलन करने वाले छात्रों का कहना है कि भले ही इस बार उनकी आवाज सीधे मंच तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन नीट अभ्यर्थियों और युवाओं के न्याय के लिए उनकी उम्मीदें और संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।






