Saturday, September 19, 2026
Home Chhattisgarh CG News: घरघोड़ा जमीन विवाद पहुंचा कलेक्टर तक, 1979 से अब तक...

CG News: घरघोड़ा जमीन विवाद पहुंचा कलेक्टर तक, 1979 से अब तक के राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग

CG News: गौरी शंकर गुप्ता\ रायगढ़/घरघोड़ा। घरघोड़ा क्षेत्र में पैतृक और संयुक्त भूमि से जुड़ा पुराना विवाद अब रायगढ़ कलेक्टर के समक्ष पहुंच गया है। आवेदक सरधाकर गुप्ता उर्फ सरधाराम गुप्ता ने मूल खसरा नंबर 86 से जुड़ी जमीन और उससे बने उप-खसरों के वर्ष 1979 से वर्तमान तक के राजस्व रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। आवेदन में बंटवारा, फौती, नामांतरण, विक्रय विलेख और भूमि हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों का खसरा-वार मिलान कराने की मांग की गई है।

आवेदक का कहना है कि वर्ष 1979 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 86 का अलग रकबा दर्ज था। इसके बाद अलग-अलग समय में हुए बंटवारे, नामांतरण, बिक्री और अन्य हस्तांतरण के चलते जमीन की स्थिति में बदलाव हुआ। ऐसे में मूल खसरा नंबर से बने सभी उप-खसरों की श्रृंखला तैयार कर प्रत्येक स्तर पर हुए बदलावों का दस्तावेजों से सत्यापन कराने की मांग की गई है।

बंटवारा और फौती प्रक्रिया की जांच की मांग

आवेदन में 1/2 बंटवारा प्रकरण के निराकरण का भी उल्लेख किया गया है। आवेदक ने दावा किया है कि बंटवारा आवेदन के निराकरण के दौरान कुछ दर्ज भूमिस्वामियों की मृत्यु से संबंधित तथ्य सामने आए थे। इसी आधार पर संबंधित व्यक्तियों के कानूनी वारिसों, फौती अथवा उत्तराधिकार प्रक्रिया और उसके बाद किए गए नामांतरण की जांच की मांग की गई है।

Read More: CG News: छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों ने खोला मोर्चा, 21 सितंबर से नियमित सेवाओं से अलग रहने का ऐलान

इसके अलावा पुराने बंटवारा आदेश, विक्रय विलेख, नामांतरण आदेश और अन्य राजस्व दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन का स्वामित्व और हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ।

रेलवे अधिग्रहण और मुआवजे का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

मामले में वर्ष 2012 में रेलवे द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की गई है। आवेदन में अधिग्रहण अधिसूचना, अवार्ड, खसरा-वार अधिग्रहित रकबा, मुआवजा भुगतान और मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है।

आवेदक ने कहा है कि यदि मुआवजा वितरण में वास्तविक हिस्सेदारों के वैधानिक अधिकार से संबंधित कोई विसंगति सामने आती है, तो उसके आधार और संबंधित दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।

BS ISPAT को हुई भूमि बिक्री पर भी सवाल

आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि मूल खसरा नंबर 86 से संबंधित कुछ भूमि BS ISPAT द्वारा खरीदी गई है। इस संबंध में बिक्री दस्तावेज, नामांतरण रिकॉर्ड और भूमि हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है।

आवेदक ने इस विवाद को 28 सितंबर 2026 को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई से भी जोड़ते हुए मांग की है कि भूमि स्वामित्व, लंबित बंटवारा और पुराने राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े विवादित बिंदुओं को जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।

जमीन सौदों में कथित दलाली के आरोप, स्वतंत्र पुष्टि नहीं

आवेदन के अलावा घरघोड़ा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के बीच जमीन की खरीद-बिक्री और कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। आवेदन से जुड़े दावों में कुछ लोगों पर औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने और जमीन सौदों में मध्यस्थता करने की बात कही गई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर फिलहाल कोई अंतिम प्रशासनिक जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष भी सामने नहीं आया है। ऐसे में जमीन सौदों और कथित कमीशन लेनदेन की वास्तविक स्थिति दस्तावेजी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Read More: Raigarh Crime: मीना बाजार में हुई दोस्ती, फिर रायपुर पहुंची विवाहिता… होटल में ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को करना पड़ा गिरफ्तार?

यथास्थिति बनाए रखने की मांग

आवेदक ने लंबित राजस्व प्रकरण के अंतिम निराकरण और सीमांकन तक विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है। साथ ही निर्माण अथवा जमीन की प्रकृति में बदलाव पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध भी किया गया है।

आवेदन में खसरा नंबर 86/7, 86/33, 86/1, 86/2, 86/3, 86/4, 86/5, 86/6, 86/8, 86/10, 86/11, 86/12, 86/14, 86/15, 86/19, 86/20, 86/25, 86/31, 86/34, 86/35, 86/36, 86/37, 86/38 और 86/42 समेत संबंधित उप-खसरों में हुए भूमि हस्तांतरण की जांच की मांग की गई है।

फिलहाल यह पूरा मामला आवेदक द्वारा कलेक्टर के समक्ष दिए गए आवेदन और उसमें की गई मांगों पर आधारित है। भूमि खरीदारों, अन्य पक्षकारों और संबंधित राजस्व अधिकारियों का पक्ष सामने आने के साथ प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।

Share The News

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here