Pandokhar Sarkar Vs Dhirendra Shastri: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश के दो चर्चित धार्मिक स्थलों से जुड़े संतों के बीच पर्चे और सिद्धि को लेकर बयानबाजी चर्चा में है। पंडोखर सरकार के पीठाधीश्वर गुरुशरण शर्मा और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयानों के बाद यह मामला सुर्खियों में आया है। गुरुशरण शर्मा ने अपनी विद्या और सिद्धि से जुड़े दावों की जांच के लिए सामने बैठकर परीक्षा कराने की बात कही है।विवाद की शुरुआत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान से हुई, जिसमें उन्होंने एक गुरु और उनके शिष्य का जिक्र करते हुए नंबर बताने को लेकर सवाल उठाया था। इसके बाद गुरुशरण शर्मा की ओर से चुनौती दिए जाने की बात सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनकी विद्या पर संदेह है तो निष्पक्ष तरीके से उसका परीक्षण किया जा सकता है।
बयान के बाद सामने आया खुला चैलेंज
गुरुशरण शर्मा के अनुसार, किसी भी विद्या या शक्ति के दावे की जांच के लिए सामने बैठकर परीक्षा कराई जा सकती है। उन्होंने मीडिया की मौजूदगी में निष्पक्ष परीक्षण का प्रस्ताव रखा।उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग संत अपनी-अपनी गद्दी पर बैठकर किसी वस्तु या जानकारी से जुड़े सवालों का जवाब दें। उनके मुताबिक, इस तरह बिना किसी पक्षपात के दावों की जांच की जा सकती है।हालांकि, इस चुनौती को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, इसकी जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
करनपिशाचिनी सिद्धि पर क्या बोले गुरुशरण शर्मा?
बातचीत के दौरान गुरुशरण शर्मा से करनपिशाचिनी सिद्धि और यक्षिणी जैसी पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ी शक्तियों के बारे में भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि कुछ लोग मन की बात, अतीत या भविष्य की जानकारी बताने की क्षमता को ऐसी सिद्धियों से जोड़ते हैं।जवाब में गुरुशरण शर्मा ने कहा कि धार्मिक और पारंपरिक चर्चाओं में इन विद्याओं का उल्लेख मिलता है। उन्होंने भारत में अलग-अलग प्रकार की साधनाओं और विद्याओं की लंबी परंपरा होने की बात कही।उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसी कोई शक्ति होने का दावा है, तो उसका परीक्षण किया जा सकता है। इस बयान के बाद Pandokhar Sarkar Vs Dhirendra Shastri विवाद को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
Read More: MP Weather: मानसून की विदाई का दौर शुरू! जानें भोपाल-इंदौर समेत सभी जिलों का मौसम
पर्चा लिखने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
गुरुशरण शर्मा ने धीरेंद्र शास्त्री के पर्चे को लेकर भी अपनी राय रखी। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दावा किया कि पर्चा लिखने की प्रक्रिया में किसी सिद्धि के बजाय ट्रिक का इस्तेमाल किया जाता है।यह गुरुशरण शर्मा का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। उन्होंने बातचीत में बागेश्वर धाम में चलने वाले भंडारे, अन्नपूर्णा और अस्पताल जैसी सेवा गतिविधियों की तारीफ भी की।इससे स्पष्ट है कि उनकी बातचीत में पर्चे की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ-साथ बागेश्वर धाम के कुछ सेवा कार्यों का उल्लेख भी किया गया।
पांच सवालों की परीक्षा और इनाम की बात
गुरुशरण शर्मा ने पंडोखर धाम में होने वाले एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पांच सवालों की परीक्षा की बात कही। उनके अनुसार, यदि पांच में से चार सवालों के सही जवाब दिए जाते हैं तो 1 करोड़ 41 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित चुनौती लॉटरी नंबर बताने से संबंधित नहीं है, बल्कि सवालों के जवाब देने से जुड़ी है। इसके साथ ही उन्होंने करनपिशाचिनी सिद्धि और दूसरी कथित शक्तियों से जुड़े दावों की जांच की बात कही।इनाम की घोषणा और परीक्षा की शर्तों से जुड़ी जानकारी फिलहाल गुरुशरण शर्मा के बयान पर आधारित है। इसकी आधिकारिक प्रक्रिया, आयोजन की तारीख और पुरस्कार दिए जाने की पुष्टि से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
धार्मिक दावों की जांच को लेकर बहस
पंडोखर सरकार और बागेश्वर धाम से जुड़े संतों के बीच सामने आई बयानबाजी ने धार्मिक विद्या, पर्चे और कथित सिद्धियों के दावों पर बहस शुरू कर दी है। गुरुशरण शर्मा ने इन दावों को निष्पक्ष परीक्षा के जरिए परखने की बात कही है।वहीं, किसी भी कथित आध्यात्मिक शक्ति या सिद्धि के दावे को प्रमाणित मानने से पहले उसके परीक्षण और उपलब्ध साक्ष्यों को देखना जरूरी है। फिलहाल यह मामला दोनों संतों से जुड़े बयानों और चुनौती तक सीमित है। आगे किसी कार्यक्रम, परीक्षा या आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।







[…] […]
[…] […]