[nishaanebaz.com] Datia News: दतिया। शहर में आयोजित 15वें हिंदी महोत्सव के अंतर्गत सातवें अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। सांस्कृतिक साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘आदित्य संस्कृति’ के तत्वावधान में होटल ब्लू स्टार में आयोजित इस एक दिवसीय सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों से करीब एक सैकड़ा साहित्यकार, कवि, लेखक और साहित्य सेवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति, संस्कार और नई पीढ़ी से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रहे, जबकि प्रसिद्ध साहित्यकार अंशु भदौरिया ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। फिल्म अभिनेता संजय मेहता भी विशेष रूप से मौजूद रहे। सम्मेलन में साहित्य और समाज के संबंधों के साथ वर्तमान समय में साहित्य की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
नरोत्तम मिश्रा बोले- हिंदी महोत्सव जैसे आयोजन बेहद जरूरी
मुख्य अतिथि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हिंदी महोत्सव जैसे आयोजन आज के समय में बेहद जरूरी हैं। देशभर के साहित्य सेवियों, हिंदी सेवियों और विचारकों का हर वर्ष दतिया की धरती पर आकर किसी ज्वलंत विषय पर विमर्श करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।उन्होंने इस आयोजन के लिए जगत शर्मा, भानु शर्मा और पूरी आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को सोचने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजनों के जरिए साहित्यकारों को एक-दूसरे से संवाद करने और अपने विचार साझा करने का अवसर मिलता है।
संजय मेहता ने कबीर-तुलसी की परंपरा का किया उल्लेख
फिल्म अभिनेता संजय मेहता ने अपने संबोधन में कहा कि हम कबीर और तुलसी की परंपरा से आने वाले लोग हैं। साहित्यकारों को साहित्यिक धरातल पर सक्रिय रहते हुए समाज को सही दिशा देने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने बदलते सामाजिक परिवेश में साहित्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।उद्घाटन सत्र में संजय मेहता को ‘कलारत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आरपी गुप्ता, डॉ. लोकेन्द्र सिंह नागर और डॉ. अनिल दुबे का भी सम्मान किया गया।
पांच सत्रों में आयोजित हुआ सम्मेलन
एक दिवसीय साहित्यकार सम्मेलन को कुल पांच सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे साहित्यकारों ने अपना परिचय और साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी साझा की। इस सत्र की अध्यक्षता भागवताचार्य पंडित चंद्रशेखर गोस्वामी, भोपाल ने की।
दूसरे सत्र में सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सद्ग्रंथों की आरती और मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इस दौरान डॉ. मीनू पाण्डेय, दिनेश प्रभात, अजय शर्मा, डॉ. मुकेश राजपूत, डॉ. दिनेश तोमर और मनिंदर सिंह सहित कई अतिथि मौजूद रहे।
‘साहित्य, संस्कृति, संस्कार और जेन जी’ पर हुआ विमर्श
सम्मेलन के तीसरे सत्र में ‘साहित्य, संस्कृति, संस्कार, संयम और जेन जी’ विषय पर चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों ने नई पीढ़ी के बदलते नजरिए, सामाजिक मूल्यों और साहित्य की भूमिका पर अपने विचार रखे।
चौथे सत्र में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया। इनमें प्रशांत दांगी, संजीव साहू, अरविन्द अग्रवाल, डॉ. हेमंत जैन, मनिंदर सिंह, पुनीत टिलवानी, महेश गुलवानी, डॉ. राजू त्यागी और उमेश अग्रवाल सहित अन्य लोग शामिल रहे। इसके अलावा करीब एक सैकड़ा साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन में बच्चों ने भी किया कविता पाठ
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें आमंत्रित और स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। स्कूली बच्चों ने भी कविता पाठ कर श्रोताओं की खूब वाहवाही हासिल की। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता दिनेश प्रभात ने की।सम्मेलन में ग्वालियर, भोपाल, नागपुर, झांसी, शहडोल, गुरुग्राम, बांदा, प्रतापगढ़, रायपुर, जयपुर, नई दिल्ली, गोरखपुर, मेरठ, निवाड़ी, बुरहानपुर, भिंड, सेंवढ़ा और भांडेर सहित कई स्थानों से साहित्यकार पहुंचे।
आयोजन समिति ने जताया आभार
सम्मेलन के समापन पर आयोजन समिति के संयोजक जगत शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित ऐसे आयोजन आगे भी जारी रहेंगे।
दतिया में आयोजित इस साहित्यकार सम्मेलन ने हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति को लेकर देशभर के रचनाकारों को एक मंच पर लाने का काम किया। पांच सत्रों में हुए विमर्श, सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन ने आयोजन को विशेष बनाया।






