नई दिल्ली [Nishanebaaz News] UPI Payment। भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण इस पर लगने वाला शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Zero MDR) है। हालांकि, लेनदेन फ्री होने की वजह से Google Pay और PhonePe जैसी फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे पर भारी रखरखाव खर्च उठाना पड़ता है। इसी वजह से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की मांग लगातार उठती रही है।
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आरबीआई का 2017 डेबिट कार्ड नियम बनेगा ब्लूप्रिंट
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का वर्ष 2017 का एक नियम, जो दुकानदारों को डेबिट कार्ड की फीस का बोझ ग्राहकों पर डालने से रोकता है, यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के लिए एक सटीक मॉडल साबित हो सकता है। आरबीआई के इस नियम को यदि थोड़े-बहुत बदलावों के साथ यूपीआई पर लागू किया जाए, तो आम जनता को नाराज किए बिना एक संतुलित शुल्क ढांचा तैयार किया जा सकता है।
छोटे दुकानदारों को मिलेगी एमडीआर से 100% छूट
रिजर्व बैंक के नियम के तहत ₹20 लाख से कम के सालाना टर्नओवर वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए डेबिट कार्ड पर MDR की ऊपरी सीमा बहुत कम (अधिकतम 0.40%) तय की गई है। इस नियम को यूपीआई पर लागू करने से छोटे किराना स्टोर्स, रेहड़ी-पटरी वालों और स्थानीय दुकानदारों को एमडीआर शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा जा सकेगा, जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।
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बड़े रिटेलर्स और ई-कॉमर्स पर लग सकता है मामूली शुल्क
इस संभावित मॉडल के तहत केवल बड़े संगठित रिटेलर्स, मॉल्स, बड़े शोरूम और ई-कॉमर्स कंपनियों से ही मामूली एमडीआर वसूला जाएगा, क्योंकि वे इस लागत को वहन करने में सक्षम हैं।
आम उपभोक्ताओं के लिए 100% फ्री रहेगा यूपीआई
नई दिल्ली [Nishanebaaz News] UPI Payment। इस नियम के लागू होने के बाद भी आम उपभोक्ताओं के लिए एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करना हमेशा की तरह 100% फ्री रहेगा। इस मॉडल से NPCI और फिनटेक कंपनियों को राजस्व प्राप्त होगा, जिसका इस्तेमाल वे अपने सर्वर और सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने में कर सकेंगी। वर्तमान में सरकार को कंपनियों के वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए हर साल करोड़ों रुपये का इंसेंटिव फंड जारी करना पड़ता है।





