Tuesday, August 18, 2026
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JSSC-CGL Cancellation: परीक्षा रद्द होते ही भड़का नया विवाद, नौकरी कर रहे अभ्यर्थी सड़कों पर

Nishaanebaz News Desk-JSSC CGL Exam Cancellation: झारखंड में 25 दिन से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने कई मांगों को मान लिया है। लेकिन JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस परीक्षा के जरिए चयनित होकर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले का विरोध शुरू कर दिया है।इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने चयन की पूरी कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के बाद नौकरी हासिल की थी। ऐसे में अब परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई चयनित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इस नौकरी के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार, 17 अगस्त को विशेष कैबिनेट बैठक हुई। इसी बैठक में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही सरकार ने 2014 से अब तक आउटसोर्स एजेंसी TDPL के माध्यम से आयोजित कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों को भी निरस्त करने की घोषणा की।सरकार के इस फैसले से लंबे समय से कथित परीक्षा गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के एक वर्ग में खुशी देखी गई। हालांकि, परीक्षा के जरिए पहले ही नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला परेशानी लेकर आया।

सचिवालय के बाहर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की।अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा और उससे जुड़े परिणाम रद्द कर दिए जाते हैं तो उनकी मौजूदा नौकरी का क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने नियुक्ति पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सामना किया और लंबे इंतजार के बाद नौकरी मिली थी।

कहा- अदालत के आदेश के बाद मिली थी नियुक्ति
प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी ने बताया कि उनकी नियुक्ति अदालत के आदेश के बाद हुई थी। उनके मुताबिक, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ था और मामले में सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी।अब JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद इन कर्मचारियों को दोबारा बेरोजगारी का डर सताने लगा है। एक अभ्यर्थी ने कहा कि नौकरी मिलने के बाद परिवार में स्थिरता आई थी, लेकिन सरकार के नए फैसले ने फिर से चिंता बढ़ा दी है।
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कई युवाओं ने पुरानी नौकरी भी छोड़ दी थी
प्रदर्शन कर रहे कुछ उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने JSSC-CGL के जरिए नियुक्ति मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी थी। अब अगर परीक्षा और परिणाम निरस्त होते हैं तो उनके सामने दोबारा रोजगार का सवाल खड़ा हो जाएगा।अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के साथ उन कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, जिन्होंने कानूनी प्रक्रिया के बाद नियुक्ति पाई और फिलहाल काम कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों की मांग अभी पूरी नहीं हुई
दूसरी तरफ JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से जुड़े छात्रों का आंदोलन भी जारी है। छात्रों का कहना है कि सरकार ने परीक्षाएं रद्द करने का फैसला तो लिया है, लेकिन कथित गड़बड़ियों की CBI जांच को लेकर अभी स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है।छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षाएं रद्द करना उनकी पूरी मांग का समाधान नहीं है। वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं और इसके लिए CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

20 अगस्त के कार्यक्रम पर भी नजर
आंदोलनकारी छात्रों के बीच 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव को लेकर चर्चा होनी है। छात्र प्रतिनिधि बैठक में आगे की रणनीति पर फैसला ले सकते हैं।ऐसे में JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद झारखंड में विवाद खत्म होने के बजाय एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्र अपने मुद्दों पर सरकार से और कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नौकरी कर रहे चयनित अभ्यर्थी अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विरोध कर रहे हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार परीक्षा और परिणाम रद्द करने के फैसले के बाद पहले से नियुक्त कर्मचारियों की नौकरी को लेकर क्या रास्ता अपनाती है। इस पर सरकार की ओर से आने वाला अगला स्पष्ट निर्णय हजारों अभ्यर्थियों के लिए बेहद अहम हो सकता है।

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