Monday, August 17, 2026
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CG News: रेलवे आरक्षित टिकटों का खेल! काउंटर से बनते थे टिकट, बनारस में होती थी बिक्री, दो गिरफ्तार

Nishaanebaz News Desk-Railway Ticket Black Marketing: रेलवे टिकटों की कालाबाजारी के मामले ने छत्तीसगढ़ से लेकर उत्तर प्रदेश तक जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की जांच में आरक्षित टिकटों की कथित अवैध खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है। जांच के बाद बैकुंठपुर में कार्यरत एक संविदा कर्मचारी और उत्तर प्रदेश निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में 60 तत्काल और सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों के स्क्रीनशॉट मिले। इन टिकटों की कुल कीमत करीब 3 लाख 68 हजार 351 रुपये बताई गई है।

रेलवे टिकटों की कालाबाजारी की जांच एक ऐसे टिकट से शुरू हुई, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। जानकारी के अनुसार 1 अगस्त 2026 को सीटी पीआरएस बैकुंठपुर के काउंटर से जारी एक खाली टिकट पर पेन से PNR नंबर और दूसरी जानकारी हाथ से लिखी गई थी।यह टिकट इलाहाबाद जंक्शन पर जांच के दौरान पकड़ा गया। जब सिस्टम में दर्ज PNR की जांच की गई तो वह गलत पाया गया। इसके बाद मामले की जानकारी सामने आई और जांच आगे बढ़ाई गई।इस मामले में जीआरपी जौनपुर में 5 अगस्त को अपराध क्रमांक 22/26 के तहत BNS की धारा 318(4) और 319(2) में मामला दर्ज किया गया था।

संविदा कर्मचारी पर लगा टिकट तैयार करने का आरोप
रेलवे टिकटों की कालाबाजारी की जांच में बैकुंठपुर स्थित सीटी पीआरएस में काम करने वाले नगर पालिका के संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार की भूमिका सामने आई। वह कोरिया जिले के चरचा थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है।जांच के अनुसार उस पर खाली टिकट पर PNR और दूसरी जानकारी हाथ से लिखकर टिकट तैयार करने का आरोप है। RPF ने पूछताछ के बाद उसकी भूमिका की जांच की और उसे मामले में गिरफ्तार किया।
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बनारस तक पहुंचता था टिकटों का नेटवर्क
रेलवे टिकटों की कालाबाजारी में उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के पिरखापुर निवासी संजय कुमार विश्वकर्मा की भूमिका भी सामने आई। जांच एजेंसी के मुताबिक अविनाश कुमार कथित तौर पर टिकट तैयार करके संजय कुमार तक पहुंचाता था।जानकारी के अनुसार टिकटों को बस के जरिए बनारस भेजा जाता था। इसके बदले अविनाश को प्रति यात्री करीब 400 रुपये कमीशन मिलने की बात जांच में सामने आई है।वहीं संजय कुमार पर इन टिकटों को ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचने का आरोप है। पूछताछ में उसके द्वारा प्रति यात्री करीब 600 से 800 रुपये तक मुनाफा कमाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

WhatsApp चैट ने खोला टिकटों का बड़ा राज
रेलवे टिकटों की कालाबाजारी से जुड़े इस मामले में सबसे अहम सुराग मोबाइल फोन से मिला। RPF ने संजय कुमार के मोबाइल की जांच की तो WhatsApp चैट में बड़ी संख्या में रेलवे आरक्षित टिकटों की जानकारी सामने आई।जांच में 60 तत्काल और सामान्य आरक्षित टिकटों के स्क्रीनशॉट मिलने की बात कही गई है। इनमें 14 टिकट ऐसे थे, जिन पर PNR और दूसरी जानकारी हाथ से लिखी गई थी। बताया गया कि इन टिकटों की जानकारी अविनाश कुमार के मोबाइल से भेजी गई थी।

बिना वैध अधिकार के हो रही थी टिकट बिक्री?
रेलवे टिकटों की कालाबाजारी की जांच के दौरान दोनों आरोपियों से रेलवे आरक्षित टिकटों की खरीद-बिक्री के लिए वैध अधिकार पत्र और संबंधित दस्तावेज मांगे गए। जांच के मुताबिक दोनों आरोपी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।RPF का आरोप है कि टिकटों को अतिरिक्त रकम लेकर ग्राहकों को बेचा जा रहा था। पूछताछ के दौरान टिकटों की खरीद-बिक्री से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

₹3.68 लाख के टिकटों का रिकॉर्ड मिला
रेलवे टिकटों की कालाबाजारी के मामले में RPF ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन से 60 टिकटों के स्क्रीनशॉट निकालकर जब्त किए हैं। इन टिकटों की कुल कीमत 3,68,351 रुपये बताई गई है।जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े थे और कितने यात्रियों तक टिकट पहुंचाए गए। मोबाइल चैट और दूसरे डिजिटल सबूत जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

रेलवे अधिनियम के तहत दोनों गिरफ्तार
रेलवे टिकटों की कालाबाजारी के मामले में RPF ने रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत कार्रवाई की है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।RPF अंबिकापुर की ओर से 16 अगस्त 2026 को अपराध क्रमांक 727/26 दर्ज किया गया। अब मामले में आगे की जांच के दौरान टिकटों के नेटवर्क, लेन-देन और संभावित अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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